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G-20 समिट 2025 प्रमुख निर्णय और विश्लेषण

08 Aug 2025 | Ful Verma | 155 views

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G-20 समिट 2025: प्रमुख निर्णय और विश्लेषण

2025 में आयोजित G-20 शिखर सम्मेलन वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और जलवायु परिवर्तन जैसे विषयों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। यह सम्मेलन ब्राजील की राजधानी ब्रासीलिया में 15-16 नवंबर 2025 को आयोजित हुआ, जिसमें विश्व की 20 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं ने भाग लिया। इस लेख में हम G-20 समिट 2025 के प्रमुख निर्णयों, घोषणाओं और उनके व्यापक विश्लेषण पर चर्चा करेंगे।

G-20 क्या है?

G-20 यानी “Group of Twenty” दुनिया के 19 प्रमुख देशों और यूरोपीय संघ का एक समूह है, जो वैश्विक आर्थिक नीति, वित्तीय स्थिरता, जलवायु परिवर्तन, टेक्नोलॉजी और भू-राजनीतिक मुद्दों पर सहयोग करता है। इसकी स्थापना 1999 में हुई थी।

G-20 के सदस्य देश

  1. भारत
  2. अर्जेंटीना
  3. ऑस्ट्रेलिया
  4. ब्राजील
  5. कनाडा
  6. चीन
  7. फ्रांस
  8. जर्मनी
  9. इंडोनेशिया
  10. इटली
  11. जापान
  12. मैक्सिको
  13. रूस
  14. सऊदी अरब
  15. दक्षिण अफ्रीका
  16. दक्षिण कोरिया
  17. तुर्किए
  18. ब्रिटेन
  19. अमेरिका
  20. यूरोपीय संघ

G-20 समिट 2025 की थीम

“Inclusive Sustainability and Digital Transformation for a Resilient Future”

इस थीम के अंतर्गत ब्राजील ने समावेशी विकास, डिजिटल समानता और जलवायु न्याय पर जोर दिया।

प्रमुख निर्णय और घोषणाएं

1 जलवायु परिवर्तन 2050 तक नेट-जीरो लक्ष्य के लिए सभी देशों की प्रतिबद्धता, हरित ऊर्जा में निवेश का वादा।

2 वैश्विक कर सुधार 15% न्यूनतम वैश्विक कॉरपोरेट टैक्स को लागू करने की रणनीति को समर्थन।

3 डिजिटल गवर्नेंस AI और डेटा सुरक्षा के लिए वैश्विक नियामक ढांचे पर सहमति।

4 खाद्य सुरक्षा अफ्रीका और दक्षिण एशिया में खाद्य भंडारण और वितरण तंत्र को सुधारने हेतु वैश्विक फंड की घोषणा।

5 वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली भविष्य की महामारियों से निपटने के लिए एक 'ग्लोबल हेल्थ टास्क फोर्स' का गठन।

6 संयुक्त राष्ट्र सुधार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता पर सर्वसम्मति, भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन।

7 वैश्विक दक्षिण का सशक्तिकरण ग्लोबल साउथ देशों के लिए विशेष निवेश योजनाओं और कर्ज राहत पैकेज की घोषणा।

प्रमुख घोषणाओं का विश्लेषण

1. जलवायु परिवर्तन पर संकल्प

G-20 देशों ने 2050 तक कार्बन न्यूट्रल बनने का लक्ष्य तय किया है। भारत ने 2070 का लक्ष्य रखा है, जिसे सम्मेलनों में यथार्थवादी माना गया। इस दिशा में ग्रीन हाइड्रोजन, सौर ऊर्जा, और जल-ऊर्जा को बढ़ावा देने की बात हुई। विकासशील देशों को तकनीकी और वित्तीय मदद देने का वादा भी किया गया।

2. डिजिटल गवर्नेंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस

AI के अनियंत्रित प्रयोग से उत्पन्न खतरों को लेकर चिंता जताई गई। एक वैश्विक AI नियामक फ्रेमवर्क पर सहमति बनी, जिसमें डेटा गोपनीयता, Deepfake नियंत्रण और AI नैतिकता शामिल है। भारत ने "Digital Public Infrastructure" मॉडल को प्रस्तुत किया जो G-20 नेताओं द्वारा सराहा गया।

3. वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली

COVID-19 जैसी वैश्विक आपदाओं से सीख लेते हुए “Global Pandemic Coordination Taskforce” की स्थापना का निर्णय लिया गया। इस टास्क फोर्स में WHO, GAVI, और G-20 देशों के स्वास्थ्य विशेषज्ञ शामिल होंगे। भारत ने वैक्सीन मित्र (Vaccine Maitri) कार्यक्रम की फिर से शुरुआत का प्रस्ताव भी रखा।

4. आर्थिक सुधार और वैश्विक टैक्स

OECD द्वारा प्रस्तावित 15% न्यूनतम वैश्विक कॉरपोरेट टैक्स को G-20 देशों का समर्थन मिला। इसका उद्देश्य टैक्स चोरी को रोकना और बहुराष्ट्रीय कंपनियों से उचित कर वसूलना है। भारत ने डिजिटल सेवाओं पर कर लगाने की अपनी नीति का बचाव किया।

5. वैश्विक दक्षिण के लिए समर्थन

G-20 समिट 2025 ने पहली बार "Global South" की चिंताओं को प्राथमिकता दी। भारत, ब्राजील, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों ने वैश्विक नीति निर्धारण में दक्षिण के देशों की भूमिका को बढ़ाने की मांग की। IMF और वर्ल्ड बैंक के माध्यम से विशेष राहत पैकेज पर सहमति बनी।

6. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार

भारत ने UNSC में स्थायी सदस्यता की माँग दोहराई, जिसे ब्राजील, रूस, फ्रांस और दक्षिण अफ्रीका ने समर्थन दिया। इससे भारत की वैश्विक कूटनीतिक स्थिति को मजबूती मिली है।

भारत की भूमिका G-20 समिट 2025 में

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिजिटल लोक सेवाओं और जनधन योजना मॉडल को वैश्विक रूप से प्रस्तुत किया।
  • “वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर” के मंत्र को भारत ने 2023 के बाद भी आगे बढ़ाया।
  • भारत ने जलवायु न्याय के लिए फंडिंग और तकनीकी सहायता की पुरजोर वकालत की।

निष्कर्ष

G-20 समिट 2025 वैश्विक स्थिरता, आर्थिक सुधार और तकनीकी संतुलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रहा। इसमें लिए गए निर्णयों का प्रभाव अगले दशक तक दिखेगा, विशेषकर विकासशील देशों के लिए यह सम्मेलन आशा की किरण लेकर आया है। भारत ने अपनी वैश्विक भूमिका को और मजबूत किया है, और ‘विश्व गुरु’ बनने की दिशा में एक और कदम आगे बढ़ाया है।

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