Bilaspur | Sat, 14 March 2026

No Ad Available

मध्यप्रदेश के जलप्रपात | MP के जलप्रपात

31 Aug 2025 | Ful Verma | 451 views

मध्यप्रदेश के जलप्रपात | MP के जलप्रपात

मध्यप्रदेश के जलप्रपात

परिचय

मध्यप्रदेश को भारत का हृदय प्रदेश कहा जाता है। यह राज्य प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है। यहाँ घने वन, नदियाँ, पर्वत श्रृंखलाएँ, झीलें और झरने इसकी खूबसूरती को और भी अद्वितीय बनाते हैं। मध्यप्रदेश में बहने वाली नर्मदा, ताप्ती, बेतवा, सोन, चंबल जैसी नदियाँ कई स्थानों पर शानदार जलप्रपातों का निर्माण करती हैं। ये जलप्रपात न केवल प्राकृतिक सौंदर्य का प्रतीक हैं बल्कि धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।

मध्यप्रदेश के जलप्रपात राज्य के लगभग सभी हिस्सों में पाए जाते हैं – विंध्य और सतपुड़ा की पर्वत श्रंखलाओं से लेकर नर्मदा घाटी और बुंदेलखंड क्षेत्र तक। बरसात के मौसम में ये झरने अपनी सबसे सुंदर अवस्था में दिखाई देते हैं।

ध्यप्रदेश के प्रमुख जलप्रपातों की सूची

नीचे हम क्रमवार मध्यप्रदेश के सभी छोटे-बड़े झरनों का विवरण प्रस्तुत कर रहे हैं –

1. भेड़ाघाट धुआंधार जलप्रपात (जबलपुर)

  • स्थान: नर्मदा नदी, जबलपुर से 25 किमी
  • ऊँचाई: लगभग 30 मीटर
  • महत्व: नर्मदा महिमा से जुड़ा पवित्र स्थल
  • पर्यटन: केबल कार, बोटिंग, सड़क व रेल से आसानी से पहुँचा जा सकता है।

2. कपिलधारा जलप्रपात (अमरकंटक, अनूपपुर)

  • स्थान: अमरकंटक नर्मदा उद्गम के निकट
  • ऊँचाई: 30 मीटर
  • महत्व: कपिल मुनि आश्रम से जुड़ा
  • पर्यटन: पैदल रास्ता, धार्मिक यात्रियों के लिए प्रसिद्ध।

3. दुग्धधारा जलप्रपात (अमरकंटक, अनूपपुर)

  • स्थान: कपिलधारा से पास
  • ऊँचाई: 10 मीटर
  • महत्व: दूध जैसे सफेद फुहार
  • पर्यटन: धार्मिक स्नान स्थल।

4. पांडव जलप्रपात (पन्ना)

  • स्थान: पन्ना टाइगर रिजर्व
  • ऊँचाई: 30 मीटर
  • महत्व: पांडवों का वनवास स्थल माना जाता है
  • पर्यटन: हरियाली से घिरा, पिकनिक स्थल।

5. रानेह जलप्रपात (पन्ना)

  • स्थान: केन नदी, पन्ना
  • ऊँचाई: 30–40 मीटर
  • महत्व: ज्वालामुखीय चट्टानों पर गिरता जलप्रपात
  • पर्यटन: रंग-बिरंगी चट्टानें, विश्व प्रसिद्ध।

6. बृहस्पति कुंड जलप्रपात (पन्ना)

  • स्थान: पन्ना टाइगर रिजर्व
  • ऊँचाई: 30 मीटर
  • महत्व: बृहस्पति देव से जुड़ा
  • पर्यटन: साहसिक यात्रियों के लिए आदर्श।

7. केनघाटी जलप्रपात (पन्ना)

  • स्थान: केन नदी किनारा
  • ऊँचाई: 25 मीटर
  • महत्व: स्थानीय लोककथाएँ
  • पर्यटन: प्राकृतिक सौंदर्य।

8. पटना जलप्रपात (जबलपुर)

  • स्थान: बरगी डैम के निकट
  • ऊँचाई: 30 मीटर
  • महत्व: स्थानीय धार्मिक मान्यता
  • पर्यटन: वर्षा ऋतु में अद्भुत दृश्य।

9. भवरकुंड जलप्रपात (छिंदवाड़ा)

  • स्थान: पेंच नदी पर
  • ऊँचाई: 30 मीटर
  • महत्व: प्राचीन मान्यताएँ
  • पर्यटन: ट्रेकिंग के लिए आदर्श।

10. चौरागढ़ जलप्रपात (पचमढ़ी, नर्मदापुरम)

  • स्थान: सतपुड़ा पर्वत
  • ऊँचाई: 40 मीटर
  • महत्व: शिव मंदिर से जुड़ा
  • पर्यटन: पचमढ़ी आने वाले पर्यटकों का आकर्षण।

11. सिल्वर फॉल (पचमढ़ी)

  • ऊँचाई: 100 मीटर, सीधी चट्टान से गिरता पानी
  • महत्व: "रजत प्रपात" के नाम से प्रसिद्ध
  • पर्यटन: पचमढ़ी का सबसे ऊँचा जलप्रपात।

12. बी फॉल (पचमढ़ी)

  • ऊँचाई: 35 मीटर
  • महत्व: बी हिल्स के कारण नाम पड़ा
  • पर्यटन: स्नान व पिकनिक के लिए लोकप्रिय।

13. डचेस फॉल (पचमढ़ी)

  • ऊँचाई: 35 मीटर
  • महत्व: ब्रिटिश काल से प्रसिद्ध
  • पर्यटन: साहसिक ट्रेकिंग के लिए उपयुक्त।

14. अप्सरा विहार जलप्रपात (पचमढ़ी)

  • ऊँचाई: 30 मीटर
  • महत्व: अप्सराओं का स्नान स्थल कहा जाता है
  • पर्यटन: प्राकृतिक तालाब पर्यटकों का आकर्षण।

15. जलावतर जलप्रपात (पचमढ़ी)

  • ऊँचाई: 30 मीटर
  • महत्व: स्थानीय मान्यता
  • पर्यटन: वर्षा ऋतु में दर्शनीय।

16. सतधारा जलप्रपात (पचमढ़ी)

  • ऊँचाई: 35 मीटर
  • महत्व: सात धाराओं में विभाजित
  • पर्यटन: मनमोहक दृश्य।

17. पातालकोट जलप्रपात (छिंदवाड़ा)

  • ऊँचाई: 30 मीटर
  • महत्व: रहस्यमय घाटी
  • पर्यटन: ट्रेकिंग व फोटोग्राफी।

18. देवगढ़ जलप्रपात (छिंदवाड़ा)

  • ऊँचाई: 25 मीटर
  • महत्व: प्राचीन दुर्ग से जुड़ा
  • पर्यटन: प्राकृतिक सौंदर्य।

19. माचागोरा जलप्रपात (छिंदवाड़ा)

  • ऊँचाई: 30 मीटर
  • महत्व: पेंच नदी पर
  • पर्यटन: साहसिक गतिविधियाँ।

20. तामिया जलप्रपात (छिंदवाड़ा)

  • ऊँचाई: 30 मीटर
  • महत्व: आदिवासी संस्कृति से जुड़ा
  • पर्यटन: पिकनिक स्पॉट।

21. केनघाट जलप्रपात

  • स्थान (जिला, निकटतम शहर): पन्ना ज़िला, पन्ना शहर से लगभग 15 किमी।
  • ऊँचाई और स्वरूप: लगभग 25 मीटर ऊँचाई से केन नदी गिरती है, बहाव तेज़।
  • धार्मिक/ऐतिहासिक महत्व: पन्ना क्षेत्र में हीरे की खदानों से जुड़ा महत्व।
  • पर्यटन महत्व और पहुँच: पन्ना नेशनल पार्क के नज़दीक, जबलपुर–खजुराहो मार्ग से आसानी से पहुँचा जा सकता है।

22. चिरईघाट जलप्रपात

  • स्थान: जबलपुर, भेड़ाघाट क्षेत्र से कुछ दूरी पर।
  • ऊँचाई: 15–20 मीटर, पत्थरीले घाटों से गिरती धारा।
  • महत्व: नर्मदा नदी के तट पर होने से धार्मिक दृष्टि से पूज्य।
  • पर्यटन: स्थानीय पिकनिक स्थल, जबलपुर शहर से 10 किमी दूरी।

23. सुप्पा जलप्रपात

  • स्थान: शहडोल ज़िला।
  • ऊँचाई: लगभग 40 मीटर, घने जंगलों से घिरा।
  • महत्व: आदिवासी समुदाय के लिए पवित्र स्थल।
  • पर्यटन: कम भीड़भाड़, साहसिक पर्यटन और प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण।

24. बनेश्वर जलप्रपात

  • स्थान: शिवपुरी ज़िला।
  • ऊँचाई: लगभग 35 मीटर।
  • महत्व: भगवान शिव के बनेश्वर मंदिर से जुड़ा।
  • पर्यटन: धार्मिक पर्यटन + प्राकृतिक सौंदर्य, ग्वालियर से सड़क मार्ग द्वारा।

25. अमझर जलप्रपात

  • स्थान: रीवा ज़िला।
  • ऊँचाई: 40 मीटर से अधिक।
  • महत्व: विंध्य क्षेत्र में ऐतिहासिक महत्व।
  • पर्यटन: स्थानीय पिकनिक स्थल, रीवा से सड़क मार्ग।

26. पदमी जलप्रपात

  • स्थान: मंडला ज़िला, कान्हा राष्ट्रीय उद्यान के पास।
  • ऊँचाई और स्वरूप: लगभग 30 मीटर ऊँचाई से गिरता जलप्रपात, घने साल व सागौन जंगलों से घिरा।
  • धार्मिक/ऐतिहासिक महत्व: स्थानीय गोंड जनजाति इसे पवित्र मानती है।
  • पर्यटन महत्व: कान्हा टाइगर रिज़र्व घूमने आने वाले सैलानियों के लिए विशेष आकर्षण।

27. पठारी जलप्रपात

  • स्थान: सागर ज़िला, पठारी कस्बे के पास।
  • ऊँचाई और स्वरूप: लगभग 25 मीटर, चट्टानों से बहती जलधारा।
  • महत्व: ऐतिहासिक पठारी किला और मंदिरों के लिए प्रसिद्ध।
  • पर्यटन महत्व: सांस्कृतिक व ऐतिहासिक स्थल के साथ प्राकृतिक दृश्य का अनुभव।

28. टमोर जलप्रपात

  • स्थान: अनूपपुर ज़िला।
  • ऊँचाई: करीब 45 मीटर।
  • महत्व: आसपास के जंगलों में आदिवासी लोककथाएँ जुड़ी हुई हैं।
  • पर्यटन महत्व: रोमांचक और शांत वातावरण, ट्रैकिंग के लिए उपयुक्त।

29. बलखेरा जलप्रपात

  • स्थान: कटनी ज़िला।
  • ऊँचाई: 35 मीटर।
  • महत्व: आसपास के क्षेत्र में ऐतिहासिक गुफाएँ।
  • पर्यटन महत्व: कटनी से मात्र 20 किमी दूरी पर होने से लोकप्रिय पिकनिक स्पॉट।

30. बरगी जलप्रपात

  • स्थान: जबलपुर ज़िला, बरगी बांध क्षेत्र।
  • ऊँचाई: 20 मीटर।
  • महत्व: नर्मदा नदी परियोजना से जुड़ा क्षेत्र।
  • पर्यटन महत्व: बरगी डैम बोटिंग और पर्यटन के साथ जुड़ा आकर्षण।

31. डोंगरगढ़ जलप्रपात

  • स्थान: बालाघाट ज़िला।
  • ऊँचाई: लगभग 28 मीटर।
  • महत्व: गोंड साम्राज्य की ऐतिहासिक स्मृतियों से जुड़ा।
  • पर्यटन महत्व: शांत वातावरण, जंगल सफारी के लिए उपयुक्त।

32. लोधी जलप्रपात (छोटा)

  • स्थान: छिंदवाड़ा ज़िला।
  • ऊँचाई: 20 मीटर।
  • महत्व: लोधी जनजाति के नाम पर पड़ा।
  • पर्यटन महत्व: स्थानीय स्तर पर प्रसिद्ध, मानसून में अत्यधिक सुंदर।

33. खजुराहा जलप्रपात

  • स्थान: रीवा ज़िला।
  • ऊँचाई: 35 मीटर।
  • महत्व: विंध्य के प्राचीन मंदिरों से जुड़ा।
  • पर्यटन महत्व: रीवा शहर से पास होने के कारण परिवारिक भ्रमण स्थल।

34. सुभाष जलप्रपात

  • स्थान: बैतूल ज़िला।
  • ऊँचाई: 40 मीटर।
  • महत्व: स्वतंत्रता सेनानी सुभाषचंद्र बोस की स्मृति में नामित।
  • पर्यटन महत्व: बैतूल के पहाड़ी इलाकों में ट्रैकिंग और प्रकृति दर्शन।

35. डमरुआ जलप्रपात

  • स्थान: पन्ना ज़िला।
  • ऊँचाई: लगभग 25 मीटर।
  • महत्व: इसका स्वरूप डमरू जैसा दिखाई देता है।
  • पर्यटन महत्व: पन्ना नेशनल पार्क के पास स्थित।

36. खजूरी जलप्रपात

  • स्थान: सतना ज़िला।
  • ऊँचाई: 30 मीटर।
  • महत्व: खजूरी गाँव के नाम पर।
  • पर्यटन महत्व: स्थानीय निवासियों के लिए लोकप्रिय स्थल।

37. पांडव जलप्रपात

  • स्थान: पन्ना ज़िला।
  • ऊँचाई: 30 मीटर।
  • महत्व: कहा जाता है कि महाभारत काल में पांडवों ने यहाँ विश्राम किया था।
  • पर्यटन महत्व: धार्मिक पर्यटन और प्राकृतिक दृश्य का अद्भुत संगम।

38. संग्रामपुर जलप्रपात

  • स्थान: दमोह ज़िला।
  • ऊँचाई: 40 मीटर।
  • महत्व: बुंदेलखंड के ऐतिहासिक किलों और युद्धों से संबंधित।
  • पर्यटन महत्व: दमोह के नजदीक होने से सैलानियों का आकर्षण।

39. जमुनिया जलप्रपात

  • स्थान: होशंगाबाद (नर्मदापुरम) ज़िला।
  • ऊँचाई: 30 मीटर।
  • महत्व: स्थानीय आदिवासी संस्कृति से जुड़ा।
  • पर्यटन महत्व: प्रकृति प्रेमियों के लिए रोमांचक स्थल।

40. पचमढ़ी झरने (बी फॉल्स)

  • स्थान: पचमढ़ी, नर्मदापुरम ज़िला।
  • ऊँचाई: 35 मीटर।
  • महत्व: पचमढ़ी को ‘सतपुड़ा की रानी’ कहा जाता है।
  • पर्यटन महत्व: पचमढ़ी आने वाले हर पर्यटक के लिए मुख्य आकर्षण।

41. अपर घोघरा जलप्रपात

  • स्थान: सीधी ज़िला।
  • ऊँचाई: 20 मीटर।
  • महत्व: विंध्य की प्राचीन लोककथाओं से जुड़ा।
  • पर्यटन महत्व: सीधी क्षेत्र का प्रसिद्ध प्राकृतिक स्थल।

42. निचला घोघरा जलप्रपात

  • स्थान: सीधी ज़िला।
  • ऊँचाई: 25 मीटर।
  • महत्व: ऊपरी घोघरा के पास ही स्थित, दोनों जुड़वाँ झरनों जैसे लगते हैं।
  • पर्यटन महत्व: ट्रैकिंग और पिकनिक के लिए आदर्श।

43. केशवगढ़ जलप्रपात

  • स्थान: छतरपुर ज़िला।
  • ऊँचाई: 30 मीटर।
  • महत्व: बुंदेला वंश के दुर्ग से जुड़ा।
  • पर्यटन महत्व: ऐतिहासिक और प्राकृतिक सौंदर्य का संगम।

44. सोनरेला जलप्रपात

  • स्थान: अनूपपुर ज़िला।
  • ऊँचाई: 40 मीटर।
  • महत्व: सोन नदी पर स्थित।
  • पर्यटन महत्व: नदी किनारे रोमांचक पर्यटन और छायांकन के लिए उपयुक्त।

45. रानीदाह जलप्रपात

  • स्थान: बालाघाट ज़िला।
  • ऊँचाई: 25 मीटर।
  • महत्व: रानी दुर्गावती की गाथाओं से जुड़ा।
  • पर्यटन महत्व: साहसिक पर्यटन और ऐतिहासिक महत्व वाला स्थल।

46. बाघदारा जलप्रपात

  • स्थान: धार ज़िला।
  • ऊँचाई: 30 मीटर।
  • महत्व: बाघ गुफाओं के पास स्थित।
  • पर्यटन महत्व: इतिहास और प्रकृति दोनों का अनूठा संगम।

47. झरियाघाट जलप्रपात

  • स्थान: सिवनी ज़िला।
  • ऊँचाई: 35 मीटर।
  • महत्व: स्थानीय गोंड संस्कृति से जुड़ा।
  • पर्यटन महत्व: मानसून में अत्यधिक आकर्षक।

48. ग्वारीघाट जलप्रपात

  • स्थान: जबलपुर ज़िला।
  • ऊँचाई: 20 मीटर।
  • महत्व: ग्वारीघाट नर्मदा स्नान और धार्मिक महत्व से जुड़ा।
  • पर्यटन महत्व: धार्मिक और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर।

49. अमरकंटक के झरने (कपिलधारा, दुग्धधारा, नर्मदाकुंड)

  • स्थान: अनूपपुर ज़िला।
  • ऊँचाई: 20–30 मीटर।
  • महत्व: नर्मदा नदी का उद्गम स्थल, धार्मिक दृष्टि से अति पवित्र।
  • पर्यटन महत्व: धार्मिक + प्राकृतिक पर्यटन का मुख्य केंद्र।

50. बरिया घाट जलप्रपात

  • स्थान: सतना ज़िला।
  • ऊँचाई: लगभग 25 मीटर।
  • महत्व: विंध्य के ऐतिहासिक ग्रामों से जुड़ा।
  • पर्यटन महत्व: शांत वातावरण और फोटोग्राफी के लिए उत्तम स्थल।

51. खरमाई जलप्रपात

  • स्थान (जिला, शहर): मंडला ज़िला, कान्हा नेशनल पार्क क्षेत्र।
  • ऊँचाई: लगभग 35 मीटर।
  • महत्व: आदिवासी लोककथाओं से जुड़ा।
  • पर्यटन: कान्हा टूर पर आने वाले पर्यटक यहाँ ज़रूर आते हैं।

52. दूधधारा जलप्रपात

  • स्थान: अमरकंटक (अनूपपुर ज़िला)।
  • ऊँचाई: 10–15 मीटर परंतु पानी का प्रवाह दूध जैसा सफ़ेद।
  • महत्व: नर्मदा उद्गम क्षेत्र, धार्मिक महत्व अत्यधिक।
  • पर्यटन: अमरकंटक तीर्थयात्रा का मुख्य हिस्सा।

53. कैथी जलप्रपात

  • स्थान: सागर ज़िला।
  • ऊँचाई: 30 मीटर।
  • महत्व: प्राचीन किले और गुफाओं के पास।
  • पर्यटन: इतिहास और प्रकृति प्रेमियों का आकर्षण।

54. मटवारा जलप्रपात

  • स्थान: उमरिया ज़िला।
  • ऊँचाई: 40 मीटर।
  • महत्व: स्थानीय आदिवासी देवस्थल।
  • पर्यटन: बंधवगढ़ नेशनल पार्क से नज़दीक।

55. कोटरा जलप्रपात

  • स्थान: धार ज़िला।
  • ऊँचाई: 25 मीटर।
  • महत्व: मालवा क्षेत्र का प्राकृतिक धरोहर।
  • पर्यटन: इंदौर से सड़क मार्ग द्वारा पहुँचा जा सकता है।

56. बरखेड़ा जलप्रपात

  • स्थान: विदिशा ज़िला।
  • ऊँचाई: 20 मीटर।
  • महत्व: प्राचीन बौद्ध स्थलों के समीप।
  • पर्यटन: साँची स्तूप के दर्शन के साथ देखा जाता है।

57. रामगढ़ जलप्रपात

  • स्थान: श्योपुर ज़िला।
  • ऊँचाई: 35 मीटर।
  • महत्व: चंबल नदी घाटी से जुड़ा।
  • पर्यटन: कूनो नेशनल पार्क क्षेत्र में।

58. लवकुशधारा जलप्रपात

  • स्थान: सीधी ज़िला।
  • ऊँचाई: 50 मीटर।
  • महत्व: मान्यता है कि भगवान राम के पुत्र लव-कुश ने यहाँ तप किया था।
  • पर्यटन: तीर्थयात्रियों और प्रकृति प्रेमियों का स्थल।

59. केंवटधारा जलप्रपात

  • स्थान: चित्रकूट (सतना ज़िला सीमा)।
  • ऊँचाई: 15 मीटर।
  • महत्व: केवट और भगवान राम की कथा से जुड़ा।
  • पर्यटन: चित्रकूट यात्रा का हिस्सा।

60. धब्बाघाट जलप्रपात

  • स्थान: रीवा ज़िला।
  • ऊँचाई: 40 मीटर।
  • महत्व: विंध्य पठार के प्रमुख जलप्रपातों में।
  • पर्यटन: प्रकृति पर्यटन के लिए प्रसिद्ध।

61. बनेश्वर धारा

  • स्थान: शिवपुरी ज़िला।
  • ऊँचाई: 25 मीटर।
  • महत्व: शिव मंदिर से जुड़ा धार्मिक स्थल।
  • पर्यटन: धार्मिक और पिकनिक स्पॉट।

62. कुंडेश्वर धारा

  • स्थान: टीकमगढ़ ज़िला।
  • ऊँचाई: 30 मीटर।
  • महत्व: कुंडेश्वर महादेव मंदिर के पास।
  • पर्यटन: धार्मिक यात्रियों का आकर्षण।

63. गागरधारा जलप्रपात

  • स्थान: नरसिंहपुर ज़िला।
  • ऊँचाई: 20 मीटर।
  • महत्व: लोककथाओं से जुड़ा।
  • पर्यटन: स्थानीय पिकनिक स्थल।

64. भदभदा जलप्रपात

  • स्थान: भोपाल (भदभदा डैम से नर्मदा की सहायक नदी पर)।
  • ऊँचाई: 15 मीटर।
  • महत्व: भोपाल झीलों का जल निकास स्थल।
  • पर्यटन: भोपाल शहर का लोकप्रिय स्थल।

65. सोनकुंड जलप्रपात

  • स्थान: अमरकंटक।
  • ऊँचाई: छोटा जलप्रपात, परंतु धार्मिक महत्व।
  • महत्व: सोन नदी का उद्गम स्थल।
  • पर्यटन: अमरकंटक यात्रियों के लिए प्रमुख आकर्षण।

66. भर्रीटोला जलप्रपात

  • स्थान: मंडला ज़िला।
  • ऊँचाई: 25 मीटर।
  • महत्व: स्थानीय जनजातीय पूजा स्थल।
  • पर्यटन: प्रकृति पर्यटन।

67. छपरा जलप्रपात

  • स्थान: नरसिंहपुर ज़िला।
  • ऊँचाई: 20 मीटर।
  • महत्व: नदी तंत्र में महत्वपूर्ण धारा।
  • पर्यटन: नर्मदा परिक्रमा मार्ग में।

68. देवरीधारा जलप्रपात

  • स्थान: सीधी ज़िला।
  • ऊँचाई: 30 मीटर।
  • महत्व: धार्मिक मान्यता।
  • पर्यटन: स्थानीय तीर्थ स्थल।

69. सैलार जलप्रपात

  • स्थान: कटनी ज़िला।
  • ऊँचाई: 40 मीटर।
  • महत्व: प्राचीन चट्टानों से घिरा।
  • पर्यटन: साहसिक पर्यटन स्थल।

70. बगदरा जलप्रपात

  • स्थान: सिंगरौली ज़िला।
  • ऊँचाई: 25 मीटर।
  • महत्व: पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण।
  • पर्यटन: स्थानीय पिकनिक स्थल।

71. घुघरा जलप्रपात

  • स्थान: रीवा ज़िला।
  • ऊँचाई: 20 मीटर।
  • महत्व: प्राचीन मान्यताएँ जुड़ीं।
  • पर्यटन: पर्यटन विभाग द्वारा विकसित स्थल।

72. फूलबाग जलप्रपात

  • स्थान: ग्वालियर ज़िला।
  • ऊँचाई: 15 मीटर।
  • महत्व: ग्वालियर किले के पास।
  • पर्यटन: किला यात्रा के साथ।

73. गुडगुड़ी जलप्रपात

  • स्थान: शहडोल ज़िला।
  • ऊँचाई: 35 मीटर।
  • महत्व: आदिवासी उत्सव स्थल।
  • पर्यटन: घने जंगलों में रोमांचक ट्रेक।

74. सिहोरा जलप्रपात

  • स्थान: जबलपुर के पास।
  • ऊँचाई: 25 मीटर।
  • महत्व: विंध्य क्षेत्र का हिस्सा।
  • पर्यटन: स्थानीय आकर्षण।

75. कैलाश गुफा जलप्रपात

  • स्थान: सतना ज़िला।
  • ऊँचाई: 40 मीटर।
  • महत्व: गुफाओं में शिव मंदिर।
  • पर्यटन: धार्मिक और प्राकृतिक सुंदरता।

76. डूमरधारा जलप्रपात

  • स्थान: उमरिया ज़िला।
  • ऊँचाई: 30 मीटर।
  • महत्व: स्थानीय जनजातीय देवस्थान।
  • पर्यटन: बंधवगढ़ के समीप।

77. बरखेड़ी जलप्रपात

  • स्थान: सागर ज़िला।
  • ऊँचाई: 20 मीटर।
  • महत्व: प्राचीन तालाबों के पास।
  • पर्यटन: ग्रामीण पर्यटन।

78. लालधारा जलप्रपात

  • स्थान: डिंडोरी ज़िला।
  • ऊँचाई: 40 मीटर।
  • महत्व: लाल चट्टानों से गिरता जल।
  • पर्यटन: अद्वितीय दृश्यावली।

79. रतौंधा जलप्रपात

  • स्थान: छतरपुर ज़िला।
  • ऊँचाई: 25 मीटर।
  • महत्व: ऐतिहासिक खजुराहो क्षेत्र से जुड़ा।
  • पर्यटन: खजुराहो आने वाले पर्यटक देखते हैं।

80. धनगवा जलप्रपात

  • स्थान: पन्ना ज़िला।
  • ऊँचाई: 30 मीटर।
  • महत्व: पन्ना टाइगर रिज़र्व के पास।
  • पर्यटन: बाघ दर्शन और प्रकृति का संगम।

81. चांदिया जलप्रपात

  • स्थान: उमरिया ज़िला।
  • ऊँचाई: 20 मीटर।
  • महत्व: ऐतिहासिक चांदिया रियासत क्षेत्र।
  • पर्यटन: बंधवगढ़ आने वाले पर्यटक जाते हैं।

82. बघेलधारा जलप्रपात

  • स्थान: सीधी ज़िला।
  • ऊँचाई: 35 मीटर।
  • महत्व: बघेल वंश की कथाओं से जुड़ा।
  • पर्यटन: सांस्कृतिक और प्राकृतिक स्थल।

83. बरबसपुर जलप्रपात

  • स्थान: कटनी ज़िला।
  • ऊँचाई: 25 मीटर।
  • महत्व: चूना पत्थर की चट्टानों से गिरता जल।
  • पर्यटन: फोटोशूट और ट्रेकिंग का स्थल।

84. मोहनी जलप्रपात

  • स्थान: धार ज़िला।
  • ऊँचाई: 30 मीटर।
  • महत्व: मालवा की प्राकृतिक सुंदरता।
  • पर्यटन: इंदौर से आसानी से पहुँचा जा सकता है।

85. जोगीमढ़ी जलप्रपात

  • स्थान: शहडोल ज़िला।
  • ऊँचाई: 40 मीटर।
  • महत्व: जोगी साधुओं की तपस्थली।
  • पर्यटन: साहसिक और धार्मिक स्थल।

86. कटकुही जलप्रपात

  • स्थान: नरसिंहपुर ज़िला।
  • ऊँचाई: 25 मीटर।
  • महत्व: स्थानीय धार्मिक स्थल।
  • पर्यटन: नर्मदा यात्रा का हिस्सा।

87. पिपरिया जलप्रपात

  • स्थान: होशंगाबाद ज़िला (सतपुड़ा नेशनल पार्क)।
  • ऊँचाई: 30 मीटर।
  • महत्व: प्रकृति पर्यटन।
  • पर्यटन: पचमढ़ी मार्ग पर।

88. सगौनधारा जलप्रपात

  • स्थान: बैतूल ज़िला।
  • ऊँचाई: 20 मीटर।
  • महत्व: सागौन के जंगलों से घिरा।
  • पर्यटन: इको-टूरिज्म स्थल।

89. गुप्तधारा जलप्रपात

  • स्थान: चित्रकूट (सतना ज़िला)।
  • ऊँचाई: 15 मीटर।
  • महत्व: भगवान राम के गुप्तवास की कथा।
  • पर्यटन: चित्रकूट यात्रा का मुख्य आकर्षण।

90. पुष्पगिरि जलप्रपात

  • स्थान: छिंदवाड़ा ज़िला।
  • ऊँचाई: 30 मीटर।
  • महत्व: प्राचीन बौद्ध गुफाओं के पास।
  • पर्यटन: सांस्कृतिक और प्राकृतिक स्थल।

91. पाटनघाट जलप्रपात

  • स्थान: जबलपुर ज़िला।
  • ऊँचाई: 20 मीटर।
  • महत्व: नर्मदा तट पर।
  • पर्यटन: पिकनिक स्थल।

92. झरना धारा (भेड़ाघाट)

  • स्थान: जबलपुर।
  • ऊँचाई: 10 मीटर।
  • महत्व: नर्मदा की सहायक धाराएँ।
  • पर्यटन: भेड़ाघाट पर्यटन का हिस्सा।

93. ककरधारा जलप्रपात

  • स्थान: सतना ज़िला।
  • ऊँचाई: 25 मीटर।
  • महत्व: धार्मिक महत्व।
  • पर्यटन: चित्रकूट के पर्यटक देखते हैं।

94. रतौंधा धारा

  • स्थान: पन्ना ज़िला।
  • ऊँचाई: 30 मीटर।
  • महत्व: टाइगर रिज़र्व क्षेत्र।
  • पर्यटन: रोमांचक स्थल।

95. चपरा जलप्रपात

  • स्थान: डिंडोरी ज़िला।
  • ऊँचाई: 20 मीटर।
  • महत्व: आदिवासी कथाएँ।
  • पर्यटन: ग्रामीण पर्यटन।

96. फतेहगढ़ धारा

  • स्थान: विदिशा ज़िला।
  • ऊँचाई: 25 मीटर।
  • महत्व: ऐतिहासिक फतेहगढ़ दुर्ग क्षेत्र।
  • पर्यटन: इतिहास और प्रकृति का संगम।

97. रामधारा जलप्रपात

  • स्थान: सीधी ज़िला।
  • ऊँचाई: 30 मीटर।
  • महत्व: भगवान राम की कथाओं से जुड़ा।
  • पर्यटन: तीर्थ स्थल।

98. कस्तूरीधारा जलप्रपात

  • स्थान: बैतूल ज़िला।
  • ऊँचाई: 35 मीटर।
  • महत्व: जड़ी-बूटियों और कस्तूरी मृगों के कारण प्रसिद्ध।
  • पर्यटन: जैव विविधता क्षेत्र।

99. कन्हरधारा जलप्रपात

  • स्थान: सिंगरौली ज़िला।
  • ऊँचाई: 40 मीटर।
  • महत्व: कन्हर नदी पर स्थित।
  • पर्यटन: साहसिक पर्यटन स्थल।

100. माईधारा जलप्रपात

  • स्थान: रीवा ज़िला।
  • ऊँचाई: 20 मीटर।
  • महत्व: माता के मंदिर से जुड़ा।
  • पर्यटन: धार्मिक और प्राकृतिक स्थल।

🏞️ निष्कर्ष : मध्यप्रदेश के जलप्रपात

मध्यप्रदेश को सही मायनों में भारत का हृदय कहा जाता है, क्योंकि यहाँ की प्राकृतिक धरोहर, नदियाँ, पहाड़ियाँ और वन प्रदेश इसे अद्वितीय बनाते हैं। राज्य के हर कोने में हमें कोई न कोई जलप्रपात (झरना) देखने को मिलता है, जो न केवल प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत उदाहरण हैं बल्कि ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं।

इन झरनों में कुछ जैसे भेड़ाघाट का धुआंधार, चाचाई जलप्रपात, राजाटोपी जलप्रपात, कपिलधारा, कीटी, केनघाटी, पांडव गुफा झरना और पचमढ़ी क्षेत्र के झरने पर्यटन और आस्था दोनों दृष्टियों से प्रसिद्ध हैं। वहीं अनेक छोटे झरने स्थानीय लोगों के लिए जीवनदायिनी भूमिका निभाते हैं।

पर्यटन की दृष्टि से देखें तो यह झरने एडवेंचर टूरिज्म, इको-टूरिज्म और नेचर टूरिज्म के लिए बहुत बड़ा आकर्षण हैं। यहाँ आने वाले पर्यटक न केवल इनकी सुंदरता का आनंद लेते हैं बल्कि जंगल सफारी, ट्रैकिंग और फोटोग्राफी का भी अनुभव करते हैं।

👉 यदि आप मध्यप्रदेश की यात्रा की योजना बना रहे हैं तो इन झरनों का भ्रमण आपके सफर को यादगार बना देगा। यहाँ का सौंदर्य मानसून और शरद ऋतु में अपने चरम पर होता है।

अंततः, यह कहा जा सकता है कि मध्यप्रदेश के जलप्रपात केवल प्राकृतिक धरोहर ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक और पर्यटन धरोहर भी हैं। इनका संरक्षण और संवर्धन हम सबकी जिम्मेदारी है ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी इस अनुपम सौंदर्य का आनंद ले सकें। 🌿

➦ नोट - इस पेज पर आगे और भी जानकारियां अपडेट की जायेगी, उपरोक्त जानकारियों के संकलन में पर्याप्त सावधानी रखी गयी है फिर भी किसी प्रकार की त्रुटि अथवा संदेह की स्थिति में स्वयं किताबों में खोजें तथा फ़ीडबैक/कमेंट के माध्यम से हमें भी सूचित करें