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वित्त आयोग – संरचना, कार्य, राज्यों में भूमिका और 15वें वित्त आयोग के मुख्य तथ्य

10 Dec 2025 | Ful Verma | 88 views

वित्त आयोग – संरचना, कार्य, राज्यों में भूमिका और 15वें वित्त आयोग के मुख्य तथ्य

वित्त आयोग (Finance Commission)

परिचय

वित्त आयोग भारत का एक संवैधानिक संस्थान है, जिसे संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत स्थापित किया गया है। इसका उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच राजस्व और वित्तीय संसाधनों का न्यायसंगत वितरण करना है।

भारत एक संघीय ढांचा वाला देश है, जिसमें केंद्र और राज्यों की अपनी वित्तीय शक्तियाँ होती हैं। राज्यों को विकास और सार्वजनिक सेवाओं के लिए वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होती है। वित्त आयोग इसी अंतर को संतुलित करता है।

वित्त आयोग की आवश्यकता

  1. राजस्व का संतुलन:
  2. केंद्र और राज्यों के बीच कर और राजस्व का निष्पक्ष वितरण।
  3. आर्थिक समानता:
  4. कमजोर और पिछड़े राज्यों को वित्तीय सहायता।
  5. संघीय ढांचे को मजबूत करना:
  6. राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता बनाए रखना।
  7. सिफारिशें देना:
  8. राज्यों के बजट, अनुदान और कर विभाजन पर सलाह।

वित्त आयोग की संरचना

वित्त आयोग का गठन राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है। इसके सदस्य अर्थशास्त्र, वित्त, प्रशासन और कानून में विशेषज्ञ होते हैं।

मुख्य संरचना

  1. अध्यक्ष (Chairperson):
  • राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त।
  • अर्थशास्त्र या वित्त में विशेषज्ञ।
  1. सदस्य (Members):
  • 4 सदस्य।
  • वित्तीय विशेषज्ञ, प्रशासनिक अनुभव रखने वाले अधिकारी और अन्य विशेषज्ञ शामिल।
  1. कार्यकाल:
  • आम तौर पर 5 वर्ष

वित्त आयोग के लिए योग्यता

अध्यक्ष के लिए

  • अर्थशास्त्र, सार्वजनिक वित्त, नीति निर्माण में विशेषज्ञता।
  • केंद्रीय या राज्य सरकार में वरिष्ठ अनुभव।

सदस्यों के लिए

  • अर्थशास्त्र, वित्तीय प्रबंधन, लेखा, प्रशासन या नीति विश्लेषण में अनुभव।
  • न्यायपालिका या संवैधानिक संस्थाओं का अनुभव लाभकारी।

परामर्शक सलाहकार परिषद (Advisory Council)

कुछ आयोगों में परामर्शक सलाहकार परिषद का गठन किया जाता है।

कार्य

  • नीतिगत सुझाव देना।
  • राज्यों और केंद्र के वित्तीय मुद्दों पर विचार-विमर्श।
  • निष्पक्ष और पारदर्शी निर्णय सुनिश्चित करना।

राज्यों में वित्त आयोग के कार्य

  1. राजस्व वितरण:
  • केंद्रीय करों का न्यायसंगत विभाजन।
  • राज्यों की वित्तीय जरूरतों के अनुसार संसाधनों का आवंटन।
  1. अनुदान (Grants) देना:
  • शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त अनुदान।
  • पिछड़े और कमजोर राज्यों के लिए वित्तीय सहायता।
  1. राज्य बजट में मार्गदर्शन:
  • बजट घाटे और ऋण नियंत्रण।
  • विकास और वित्तीय अनुशासन में सलाह।

15वें वित्त आयोग – मुख्य तथ्य

15वें वित्त आयोग का गठन 1 अक्टूबर 2017 को हुआ और इसका कार्यकाल 2017–2022 तक था।

अध्यक्ष और सदस्य

  • अध्यक्ष: नागराजन श्रीराम (N.K. Singh)
  • सदस्य: विजयलक्ष्मी सिंह, राजेश गुप्ता और अन्य तीन सदस्य

महत्वपूर्ण सिफारिशें

  1. राजस्व वितरण:
  • केंद्रीय करों का 42% राज्यों में विभाजन।
  • पिछड़े राज्यों को प्राथमिकता।
  1. राज्यों के लिए अनुदान:
  • शिक्षा, स्वास्थ्य और अवसंरचना विकास के लिए अतिरिक्त वित्त।
  1. वित्तीय अनुशासन:
  • बजट घाटे और ऋण नियंत्रण।
  1. विशेष सिफारिशें:
  • शिक्षा और स्वास्थ्य में राज्यों के योगदान को बढ़ावा।
  • ऊर्जा और ग्रामीण विकास में वित्तीय सहायता।

रिपोर्ट का महत्व

  • राज्यों की वित्तीय स्थिति, कर संग्रह और बजट घाटे का विश्लेषण।
  • संघ और राज्यों के बीच वित्तीय संतुलन पर सुझाव।

वित्त आयोग के महत्व

  1. संघीय ढांचे को मजबूत बनाना।
  2. राज्यों की वित्तीय स्वतंत्रता बनाए रखना।
  3. गरीब और पिछड़े राज्यों को अतिरिक्त सहायता देना।
  4. राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों में योगदान।
  5. निष्पक्ष और पारदर्शी वित्तीय निर्णय।


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