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छत्तीसगढ़ में ब्रिटिश कालीन शिक्षा व्यवस्था | British Education System in Chhattisgarh

10 Dec 2025 | Ful Verma | 101 views

छत्तीसगढ़ में ब्रिटिश कालीन शिक्षा व्यवस्था | British Education System in Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में ब्रिटिश कालीन शिक्षा व्यवस्था

भूमिका : छत्तीसगढ़ की शिक्षा यात्रा का इतिहास

छत्तीसगढ़ भारतीय उपमहाद्वीप का वह क्षेत्र है जिसकी सांस्कृतिक जड़ें अत्यंत प्राचीन हैं। यहाँ की शिक्षा परंपरा वैदिक काल, जैन-बौद्ध काल, मध्यकालीन लोक-परंपराओं और आगे चलकर औपनिवेशिक शासन—सभी के प्रभाव में विकसित हुई। शिक्षा केवल विद्यालयों तक सीमित नहीं थी, बल्कि जंगलों, देवगुड़ियों, गौठानों, चौपालों और मंदिरों के आँगन सीखने-सिखाने के प्रमुख केंद्र थे।

ब्रिटिश शासन के बाद शिक्षा व्यवस्था में बड़ा परिवर्तन आया—

  • पारंपरिक ज्ञान से हटकर
  • अंग्रेज़ी आधारित, परीक्षाओं पर आधारित, कागज़-किताब आधारित शिक्षा प्रणाली स्थापित की गई।

इस पोस्ट में हम दो मुख्य भागों पर विस्तृत चर्चा करेंगे—

  1. ब्रिटिश शासन से पहले छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था
  2. ब्रिटिश कालीन शिक्षा व्यवस्था (1854–1947)

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भाग 1 : ब्रिटिश शासन से पहले छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था

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1. प्राचीन काल में छत्तीसगढ़ की शिक्षा प्रणाली

छत्तीसगढ़ का इतिहास लगभग 3000 वर्ष पुराना माना जाता है। प्राचीन काल में यहाँ की शिक्षा मुख्यतः 3 स्रोतों से चलती थी—

✔ गुरुकुल प्रणाली

✔ आश्रम परंपरा

✔ मंदिर आधारित शिक्षा

📍 1.1 गुरुकुल परंपरा

  • यहाँ छात्रों को गुरु के आश्रम में रहकर शिक्षा प्राप्त करनी होती थी।
  • शिक्षा नि:शुल्क दी जाती थी, केवल ‘गुरुदक्षिणा’ परंपरा थी।
  • प्रमुख विषय थे—
  • वेद
  • गणित
  • साहित्य
  • खगोल-शास्त्र
  • धर्मशास्त्र
  • कृषि ज्ञान
  • धनुर्वेद / शस्त्र प्रशिक्षण

छत्तीसगढ़ के अनेक क्षेत्र, विशेषकर महानदी घाटी, सिरपुर, रतनपुर, माल्हार आदि शिक्षा के प्राचीन केंद्र रहे हैं।

📍 1.2 बौद्ध-विहारों का प्रभाव

सिरपुर में उत्खनन के दौरान मिले मठों और विहारों के प्रमाण बताते हैं कि 6वीं–10वीं शताब्दी में छत्तीसगढ़ एक महत्वपूर्ण शिक्षा केंद्र था।

यहाँ—

  • पाली
  • संस्कृत
  • तर्कशास्त्र
  • चिकित्सा
  • मूर्तिशिल्प
  • आदि विषय पढ़ाए जाते थे।

📍 1.3 मंदिरों में शिक्षा

  • ब्राह्मण बच्चों, ग्रामीणों और स्थानीय युवाओं को मंदिरों में शास्त्र, ज्योतिष और संस्कृत शिक्षा मिलती थी।
  • मंदिरों के पुजारी और ‘कुलगुरु’ शिक्षक की भूमिका निभाते थे।

2. मध्यकाल में शिक्षा : लोकपरंपरा और व्यावहारिक ज्ञान

मध्यकाल में छत्तीसगढ़ का बड़ा भाग गोंड राजाओं के शासन में था—गढ़ों, परगनों और जंगलों वाला यह इलाक़ा शिक्षा को अलग रूप में विकसित करता है।

✔ 2.1 आदिवासी शिक्षा परंपरा

आदिवासी समाज में शिक्षा पुस्तकों पर आधारित नहीं थी। यह पूरी तरह जीवन आधारित, अनुभव आधारित और लोक संस्कृति से जुड़ी थी।

आदिवासी शिक्षा के प्रमुख पहलू—

  • प्रकृति ज्ञान (जंगल, जड़ी-बूटी)
  • कृषि और बियारी
  • मछली पकड़ना
  • परंपरागत औषधियां
  • नृत्य-संगीत
  • सामाजिक व्यवस्था (गोटुल प्रणाली)

✔ 2.2 गोटुल (Ghotul) – शिक्षा का सामाजिक विश्वविद्यालय

विशेषकर मुरिया, हल्बा, अबूझमाड़िया आदिवासियों में गोटुल एक प्रकार की सामुदायिक शिक्षालय था।

यहाँ लड़के-लड़कियाँ दोनों सीखते थे—

  • अनुशासन
  • लोकनृत्य
  • सांस्कृतिक मूल्य
  • सामूहिक जीवन
  • शिकार कौशल
  • सामाजिक नियम

ब्रिटिश काल के वर्णनों में गोटुल को एक बहुत ही उन्नत सामाजिक शिक्षा संस्था माना गया है।

3. छत्तीसगढ़ में मुस्लिम शासन/मराठा शासन के दौरान शिक्षा

📍 3.1 मराठा काल (1741–1818)

छत्तीसगढ़ मराठों के अधीन था, और इस दौरान—

  • मंदिर आधारित शिक्षा जारी रही
  • मराठी लिपि और भाषा का प्रभाव बढ़ा
  • पंडितों और पुरोहितों को भूमि अनुदान देकर शिक्षा को प्रोत्साहन मिला

📍 3.2 उर्दू-फ़ारसी शिक्षा

जगदलपुर, रायपुर और बिलासपुर में कुछ क्षेत्रों में मकतब और मदरसे भी चलाए जाते थे।

4. ब्रिटिश शासन से पहले शिक्षा की मुख्य विशेषताएँ

✔ ग्रामीण और सामुदायिक शिक्षा

✔ मंदिर, आश्रम और गोटुल प्रमुख केंद्र

✔ जाति आधारित सीमाएँ

✔ महिलाओं की शिक्षा सीमित

✔ मौखिक शिक्षा–परंपरा प्रमुख

✔ हिंदी, छत्तीसगढ़ी, संस्कृत, पाली, उर्दू का प्रयोग

✔ परीक्षा प्रणाली नहीं — ज्ञान जीवन आधारित

यह वह पृष्ठभूमि थी जिस पर ब्रिटिश शासन आने के बाद शिक्षा व्यवस्था को एक नई दिशा मिली।

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भाग 2 : छत्तीसगढ़ में ब्रिटिश कालीन शिक्षा व्यवस्था (1854–1947)

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ब्रिटिशों ने छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक कारणों से शिक्षा प्रणाली को बदला और ‘औपनिवेशिक मॉडल’ लागू किया।

ब्रिटिश काल को 3 चरणों में समझा जा सकता है—

  1. प्रारंभिक काल (1818–1854) – शिक्षा नगण्य
  2. विकास काल (1854–1905) – वुड्स डिस्पैच प्रभाव
  3. विस्तार काल (1905–1947) – मिशनरी स्कूल, महिलात्मक शिक्षा, हाई स्कूल

आइए विस्तार से समझते हैं…

1. प्रारंभिक ब्रिटिश काल (1818–1854)

1818 में अंग्रेज़ों ने मराठों को हराकर रायपुर क्षेत्र पर नियंत्रण कर लिया। इस समय छत्तीसगढ़ शिक्षा के मामले में बहुत पिछड़ा था।

📍 1.1 अंग्रेज़ों की प्राथमिक रुचि — ‘राजस्व व व्यवस्था’

वे शिक्षा फैलाने के उद्देश्य से नहीं आए थे।

उनके लिए—

  • कर वसूली
  • कानून व्यवस्था
  • वन संसाधनों पर नियंत्रण
  • ज्यादा महत्वपूर्ण था।

📍 1.2 पारंपरिक स्कूल चले पर सरकारी संरक्षण नहीं मिला

  • गाँवों के पंडित अब भी बच्चों को पढ़ाते थे
  • धर्म आधारित शिक्षा जारी थी
  • परन्तु सरकारी धन या नीति का कोई असर नहीं था

2. वुड्स डिस्पैच (1854) और छत्तीसगढ़ में आधुनिक शिक्षा का प्रारंभ

1854 का वुड्स डिस्पैच भारत की शिक्षा प्रणाली का संविधान कहा जाता है।

इसके बाद छत्तीसगढ़ में पहली बार—

  • सरकारी स्कूल
  • प्रशिक्षण स्कूल
  • अंग्रेज़ी शिक्षा
  • परीक्षा प्रणाली
  • आने लगी।

📍 2.1 मिशनरियों की भूमिका

1860 के बाद अमेरिकन और जर्मन मिशनरियों ने छत्तीसगढ़ में शिक्षा फैलाने में बड़ी भूमिका निभाई।

उन्होंने—

  • पहला गर्ल्स स्कूल
  • पहला बोर्डिंग स्कूल
  • पहला मेडिकल शैक्षणिक केंद्र
  • संचालित किया।

📍 प्रमुख मिशनरी केंद्र –

  • रायपुर
  • बिलासपुर
  • जगदलपुर
  • कांकेर
  • राजनांदगाँव

3. 1870–1905 : शिक्षा का संस्थागत विकास

✔ 3.1 प्राथमिक विद्यालयों की स्थापना

1872 के सर्वेक्षण में रायपुर जिले में लगभग 30–35 प्राथमिक विद्यालय दर्ज हुए।

इनमें—

  • गणित
  • हिंदी
  • उर्दू
  • व्यावहारिक ज्ञान
  • पढ़ाया जाता था।

✔ 3.2 अंग्रेज़ी शिक्षा का प्रारंभ

अंग्रेज़ी शिक्षा का उद्देश्य स्पष्ट था—

  • अंग्रेज़ी शासन का सहायक वर्ग तैयार करना
  • क्लर्क, मुंसिफ, पटवारी, दफ्तर कर्मचारी तैयार करना

रायपुर में पहला अंग्रेज़ी माध्यम उच्च विद्यालय लगभग 1880–1882 के बीच स्थापित हुआ।

✔ 3.3 शिक्षक प्रशिक्षण स्कूल

1890 के दशक में शिक्षक प्रशिक्षण हेतु Normal School खोला गया।

4. 1905–1947 : शिक्षा का विस्तार

यह छत्तीसगढ़ की आधुनिक शिक्षा व्यवस्था का सबसे सक्रिय काल था।

⭐ 4.1 महिलाओं की शिक्षा

मिशनरियों ने महिलाओं की शिक्षा में विशेष योगदान दिया—

🎀 प्रमुख उपलब्धियाँ

  • पहला गर्ल्स मिडिल स्कूल
  • महिला आवासीय विद्यालय
  • सुई-कढ़ाई, गृह-विज्ञान प्रशिक्षण
  • महिला शिक्षिकाओं की नियुक्ति

🎀 सामाजिक बाधाएँ

  • रूढ़िवाद
  • पाबंदियाँ
  • कन्या शिक्षा को अनावश्यक समझना

फिर भी 1930 के दशक में महिला छात्रों की संख्या काफी बढ़ने लगी।

⭐ 4.2 आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा

ब्रिटिश शासन से पहले आदिवासी शिक्षा अनौपचारिक थी।

ब्रिटिश काल में—

  • प्राथमिक स्कूल
  • बोर्डिंग स्कूल
  • मिशनरी विद्यालय
  • स्थापित किए गए।

✔ समस्याएँ—

  • पहाड़ी वन क्षेत्रों तक पहुँच की कमी
  • भाषा की समस्या
  • गरीबी
  • विद्यालयों में स्थानीय संस्कृति का अभाव

✔ परिणाम—

  • धीरे-धीरे साक्षरता बढ़ी
  • प्रशासनिक नौकरियों में आदिवासी युवाओं की भागीदारी शुरू हुई

⭐ 4.3 हाई स्कूल और कॉलेजों की स्थापना

🎓 प्रमुख उपलब्धियाँ—

  • 1920–1940 के बीच प्रथम हाई स्कूल स्थापित
  • इंटरमीडिएट बोर्डिंग
  • अंग्रेज़ी और विज्ञान शिक्षण की शुरुआत
  • रायपुर में मोरिस कॉलेज (आज का पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय का बीज)

ये संस्थान छत्तीसगढ़ के आधुनिक शिक्षित वर्ग की नींव बने।

5. ब्रिटिश शिक्षा प्रणाली की विशेषताएँ

✔ परीक्षा आधारित प्रणाली

✔ अंग्रेज़ी को प्रतिष्ठा की भाषा बनाया

✔ सरकारी और मिशनरी स्कूलों का मिश्रित ढांचा

✔ शिक्षक प्रशिक्षण को औपचारिक रूप दिया

✔ शिक्षा में धार्मिक तटस्थता (Mission Schools को छोड़कर)

✔ शहरी क्षेत्रों पर अधिक ध्यान

6. ब्रिटिश शिक्षा का छत्तीसगढ़ पर प्रभाव

⭐ सकारात्मक प्रभाव

✔ आधुनिक शिक्षा का आरंभ

✔ प्रशासनिक नौकरियों में अवसर

✔ महिलाओं की शिक्षा का विकास

✔ आदिवासी क्षेत्रों में औपचारिक साक्षरता

✔ विज्ञान और गणित की पढ़ाई

✔ कॉलेज शिक्षा की स्थापना

⭐ नकारात्मक प्रभाव

❌ पारंपरिक शिक्षा कमजोर हुई

❌ गोटुल जैसी जीवन-आधारित संस्थाओं को कमतर समझा गया

❌ शिक्षा शहरों तक सीमित

❌ अंग्रेज़ी ज्ञान आधारित अभिजात वर्ग तैयार हुआ

❌ स्थानीय भाषाएँ—छत्तीसगढ़ी, गोंडी, हल्बी—उपेक्षित

7. ब्रिटिश काल के अंत तक छत्तीसगढ़ की शिक्षा स्थिति (1947)

🎓 कुल मिलाकर—

  • प्राथमिक शिक्षा फैल चुकी थी
  • हाई स्कूल सीमित थे
  • कॉलेज बहुत कम
  • महिला शिक्षा आरंभिक अवस्था में
  • आदिवासी क्षेत्रों में सीमित प्रगति
  • कुल साक्षरता 10–12% के बीच

लेकिन फिर भी यह चरण आधुनिक छत्तीसगढ़ की नींव था।

निष्कर्ष : छत्तीसगढ़ की शिक्षा—परंपरा से आधुनिकता तक

छत्तीसगढ़ की शिक्षा यात्रा बेहद समृद्ध और विविध रही है—

✔ प्राचीन गुरुकुल और मंदिर

✔ आदिवासी गोटुल परंपरा

✔ बौद्ध विहार

✔ मराठा और मध्यकाल

✔ ब्रिटिश औपनिवेशिक शिक्षा

✔ आधुनिक स्कूल और कॉलेज

ब्रिटिश शासन ने छत्तीसगढ़ की शिक्षा को औपचारिक, अंग्रेज़ी आधारित और परीक्षा आधारित बनाया, जबकि इससे पहले शिक्षा पूरी तरह जीवन आधारित, सांस्कृतिक और मौखिक परंपरा पर आधारित थी।


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