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छत्तीसगढ़ के राष्ट्रीय उद्यान - इंद्रावती, कांगेर घाटी और गुरु घासीदास पूरी जानकारी

31 Aug 2025 | Ful Verma | 305 views

छत्तीसगढ़ के राष्ट्रीय उद्यान - इंद्रावती, कांगेर घाटी और गुरु घासीदास पूरी जानकारी

छत्तीसगढ़ के राष्ट्रीय उद्यान - इंद्रावती, कांगेर घाटी और गुरु घासीदास

परिचय

छत्तीसगढ़ का प्राकृतिक सौंदर्य और जैव विविधता इसे भारत के प्रमुख इको-टूरिज़्म राज्यों में शामिल करती है। राज्य में कुल तीन राष्ट्रीय उद्यान हैं:

  1. इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान – बीजापुर जिले में, भारत के सबसे बड़े गौर संरक्षण क्षेत्र में से एक।
  2. कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान – बस्तर जिले में, गुफाओं और वन्य जीवन के लिए प्रसिद्ध।
  3. गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान – कोरिया और सूरजपुर जिले में, पहले संजय राष्ट्रीय उद्यान के नाम से जाना जाता था।

ये राष्ट्रीय उद्यान जैव विविधता, पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इनके माध्यम से वन्य जीवन का संरक्षण, स्थानीय रोजगार और पर्यटक आकर्षण सुनिश्चित होता है।

वर्तमान में छत्तीसगढ़ में 3 राष्ट्रीय उद्यानो है

  • (1) इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान ( Indravati National Park )
  • (2) कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान ( Kanger Valley National Park )
  • (3) गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान ( Guru Ghasidas National Park )

1. इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान (Indravati National Park)

स्थान और इतिहास

  • स्थापना : 1978
  • राष्ट्रीय उद्यान : 1981
  • प्रोजेक्ट टाइगर :1983
  • टाइगर रिजर्व : 2009
  • जिला : बीजापुर
  • क्षेत्रफल : 1258 वर्ग किमी ( टाइगर रिजर्व बनने के बाद 2799 वर्ग किमी )
  • यह राष्ट्रीय उद्यान छत्तीसगढ़ राज्य का एकमात्र ‘टाइगर रिजर्व’ है।
  • इंद्रावती नदी के किनारे बसे होने के कारण इसका नाम इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान है।
  • इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान भारत का सबसे बड़ा गौर संरक्षण क्षेत्र है।

इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान में पाये जाने वाले वन्य जीव-जंतु

  • जंगली भैंसे, बारहसिंगा, बाघ, चीते, नीलगाय, सांभर, 
  • जंगली कुत्ते, जंगली सूअर, उड़ने वाली गिलहरियां,
  •  साही, बंदर और लंगूर आदि अन्य अनेक पाए जाते हैं।

वनस्पति और पारिस्थितिकी

  • मिश्रित जंगल: पर्णपाती और सदाबहार वृक्ष।
  • प्रमुख वृक्ष: साल, सागौन, नीम और हर्रा।
  • यहाँ की नदियाँ और जल स्रोत वन्य जीवों के लिए जीवनदायिनी हैं।

पर्यटन और गतिविधियाँ

  • भद्रकाली : भोपालपटनम से 70 कि.मी. की दूरी पर भद्रकाली नामक स्थान पर इंदरावती एवं गोदावरी नदी का संगम है। यह स्थान बहुत ही खुबसूरत है। पर्यटक इस स्थान पर पिकनीक का आनंद लेते है।
  • फोटो-सफारी, जंगल ट्रेकिंग और बर्ड-वॉचिंग।
  • अक्टूबर से मार्च का समय सर्वोत्तम।
  • स्थानीय गाइड की मदद आवश्यक।

2. कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान (Kanger Ghati National Park)

स्थान और इतिहास

  • जिला: बस्तर
  • क्षेत्रफल: 200 वर्ग किलोमीटर
  • स्थापना वर्ष: 1982
  • कांगेर घाटी अपनी प्राकृतिक सुंदरता, गुफाओं और झरनों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ पाए जाते हैं।

मुख्य आकर्षण

  • प्रदेश का सबसे छोटा राष्ट्रिय उद्यान
  • इसके मध्य से कांगेर नदी बहती है।
  • जगदलपुर से मात्र 27 कि.मी. की दूरी पर स्थित है
  • यह एक ‘बायोस्फीयर रिजर्व’ है।
  • कुटुमसार की गुफाएं, कैलाश गुफाए, डंडक की गुफाए और तीर्थगढ़ जलप्रपात।कांगेर धारा भीमसा धारा,दो सुंदर और अद्भुत पिकनिक रिजॉर्ट हैं।
  • इसके अंतर्गत मुनगाबहार नदी पर तिरथगढ जलप्रपात (छग. का सबसे ऊँचा जलप्रपात) स्थित है।
  • कांगेर नदी के भैंसादरहा नामक स्थान पर मगरमच्छो का प्राकृतिक स्थान है।
  • इसके अंतर्गत कुटरूवन (वनभैंसा का घर) है।
  • कांगेर घाटी रा. उद्यान में कुटुमसर की गुफा है।
  • बस्तर में पहाड़ी मैंना का संरक्षण किया जा रहा है।

पाये जाने वाले वन्य जीव-जंतु

  • पहाडी मैंना
  • उडन गिलहरी
  • रिशस बन्दर

दर्शनीय स्थल:-

यहां के घने वन, लतायें-कुंज, बांस एवं बेलाओं के झुरमुट, रमणीक पहाडि यां, तितलियां, चहकते पक्षी, रहस्यमयी गुफायें, सुन्दर जलप्रपात, सर्वत्र नदी-नाले में कलख करता जल एवं बिखरे हुए दरहा आपको अपलक निहारने एवं अप्रितम आनन्द में डूब जाने के लिये मजबूर कर देगा ।

कोटमसर गुफा :

  • वर्ष 1900 में खोजी गई तथा वर्ष 1915 में डॉ. शंकर तिवारी ने सर्वेक्षण किया ।
  • यह गुफा स्टेलटाईट और स्टेलेमाईट स्तंभों से घिरी हुई है |
  • गुफा के धरातल में कई छोटे-छोटे पोखर है । जिनमें प्रसिद्ध अंधी मछलियां पाये जाते है ।
  • गुफा के अंत में स्टेलेग्माइट शिवलिंग है ।
  • गुफा में सोलार लेम्प एवं गाइड की सहायता से घूमा जाता है ।

कैलाश गुफा :

  • इसकी खोज अप्रेल 1993 में राष्ट्रीय उद्यान के अधिकारी एवं कर्मचारियों द्वारा की गई ।
  • कोटमसर वनग्राम से लोवर कांगेर वैली रोड पर 16 कि.मी. दूर स्थित है|
  • यह गुफा 200 मीटर लंबी एवं 35-50 मीटर गहरी है ।
  • गुफा के अंदर विशाल दरबार हाल है, जिसमें स्टेलेक्टाइट, स्टेलेग्माइट एवं ड्रिप स्टोन की आकर्षक संरचनायें है ।
  • गुफा के भीतर एक म्यूजिक प्वाइंट है, जहां चूने की संरचनाओं को पत्थर से टकरा कर संगीत का आनन्द लिया जा सकता है ।
  • गुफा के अंत में शिवलिंग विद्यमान है । गुफा को सौर उर्जा से आलोकित किया गया है

दंडक गुफा :

  • खोज अप्रेल 1995 में की गई ।
  • यह गुफा 200 मीटर लंबी 15-25 मीटर गहरी है ।
  • इसमें भी सोलार लेम्प का उपयोग किया जाता है ।

तीरथगढ जलप्रपात :

  • यह जल प्रपात जगदलपुर के दक्षिण पश्चमी दिशा में 39 कि.मी की दूरी पर स्थित है
  • या सुरम्य जल प्रपात मुनगाबहार नदी से 300 फीट नीचे की ओर कई स्तरों में गिरता है |
  • यहां जल प्रपात के नीचे शिव – पार्वती मंदिर भी स्थित है ।

कांगेर धारा :

  • कोटमसर ग्राम के समीप कांगेर नदी लघु जल प्रपात है, जो कई स्थानों पर झरनों के रूप में गिरता है ।
  • यहां की पथरीली चट्टानें, उथले जलकुण्ड, वादियां एवं कल-कल अविरल बहते जल प्रवाह की ध्वनि मुख्य आकर्षण है ।

भैंसा दरहा :

  • कांगेर नदी पर चार हेक्ट क्षेत्र में फेला हुआ विशाल प्राकृतिक झील का जलक्षेत्र है, जिसे भैंसा दरहा कहते है । यह घने बांस के वनों एवं झुरमुटों के बीच स्थित है ।
  • कांगेर नदी पार्क में कोटमसर से अल्हड़तापूर्वक कूदती-फांदती हुई यहां पर ठहर कर एकदम शंत हो जाती है । यह मगरों एवं कछुओं का नैसर्गिक वास है ।
  • इस दरहा की ज्ञात गहराई 20 मीटर है ।
  • यह झील पूर्वी दिशा में शबरी (कोलाब) नदी में समा जाती है ।

3. गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान (Guru Ghasidas National Park)

स्थान और इतिहास

  • स्थापना : 1981 ( पुराना नाम संजय राष्ट्रीय उद्यान ) 2001 से गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान
  • राष्ट्रीय उद्यान : 1981
  • प्रोजेक्ट टाइगर :1983
  • टाइगर रिजर्व : 2009
  • जिला : कोरिया एवं सूरजपुर
  • क्षेत्रफल : 1441 वर्ग किमी ( टाइगर रिजर्व बनने के बाद 2799 वर्ग किमी )
  • यह उद्यान मुख्य रूप से बाघ और तेंदुए के लिए प्रसिद्ध है। अन्य जीव-जंतु: हिरण, जंगली सुअर, भालू।
  •  क्षेत्रफल की दृष्टि से यह प्रदेश का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है | इसके पूर्व 1981 से यह पूर्ववर्ती संजय राष्ट्रीय उद्यान का भाग था | 

पाये जाने वाले वन्य जीव-जंतु

  • बाघ, नीलगाय, तेदुंआ, गौर, सांभर
  • सभी राष्ट्रीय उद्यानों से इस उद्यान में बाघ सर्वाधिक पाये जाते है।

दर्शनीय स्थल:-

गांगीरानी माता की गुफा :

  • यह रॉक कट गुफा है जहां गांगीरानी माता विराजमान है।
  • गुफा के पास बहुत बडा तालाब है जिसमें सालों भर पानी रहता है।
  • यहां रामनवमी के अवसर पर मेला लगता है।

नीलकंठ जलप्रपात बसेरा :

  • सघन वन से घिरा हुआ 100 फीट से अधिक ऊंचाई से गिरता जलप्रपात है।
  • यहां का विशाल शिवलिंग भी प्रमुख आकर्षण केन्द्र है।

सिद्धबाबा की गुफा :

  • सर्प देवता स्वरूप में सिद्धबाबा का निवास स्थल है
  • यहां रामनवमी के दिन मेला लगता है।
  • उस दिन सर्प देवता बाहर निकलकर भक्तों से दूध पीते हैं यहॉं लोग मन्नत भी मांगते हैं।

च्यूल जल प्रपात :

  • यह च्यूल से लगभग 5 कि.मी. की दूरी पर सघन वन से घिरा लगभग 50 फीट की ऊंचाई से गिरता सदाबहार
  • जल प्रपात है। नीचे जल कुंड है जिसमें जलक्रीडा का आनंद लिया जा सकता है।

खोहरा पाट :

  • यह च्यूल से लगभग 20 कि.मी. है यह स्थान पाइंट हिलटाप पर है
  • जहां खोहरा ग्राम बसा है।
  • यहां से सघन वन, एवं घाटी का विहगंम दृश्य देखते ही बनता है।

तीनों राष्ट्रीय उद्यानों में पाए जाने वाले प्रमुख जीव-जंतु

  • स्तनधारी: बाघ, तेंदुआ, गौर, जंगली हाथी, भालू, हिरण, जंगली सुअर
  • पक्षी: हॉर्नबिल, मोर, नीलकंठ, बटेर, गौरैया
  • सरीसृप: गैंडर, सांप, छिपकली
  • कीट: तितली, मधुमक्खी, मकड़ी, अन्य कीट

छत्तीसगढ़ के राष्ट्रीय उद्यानों का महत्व

  1. वन्य जीवन संरक्षण – लुप्तप्राय प्रजातियों की रक्षा।
  2. पर्यावरण संतुलन – पारिस्थितिकी तंत्र बनाए रखना।
  3. पर्यटन और रोजगार – स्थानीय समुदायों को लाभ।
  4. शोध और शिक्षा – छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए शैक्षणिक केंद्र।

➦ नोट - इस पेज पर आगे और भी जानकारियां अपडेट की जायेगी, उपरोक्त जानकारियों के संकलन में पर्याप्त सावधानी रखी गयी है फिर भी किसी प्रकार की त्रुटि अथवा संदेह की स्थिति में स्वयं किताबों में खोजें तथा फ़ीडबैक/कमेंट के माध्यम से हमें भी सूचित करें छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय उद्यान, इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान