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छत्तीसगढ़ के वन्य जीव अभ्यारण | Wildlife Sanctuary of Chhattisgarh

25 Sep 2025 | Ful Verma | 335 views

छत्तीसगढ़ के वन्य जीव अभ्यारण | Wildlife Sanctuary of Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ के अभयारण्य : स्थापना वर्ष, सूची व विवरण विस्तृत अध्ययन

प्रस्तावना

भारत प्राचीन काल से ही जैव-विविधता और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध देश रहा है। यहाँ पर्वत, नदियाँ, घने वन और विविध जलवायु ने अनेकों वन्य जीवों व पौधों को जीवनदान दिया है। इसी विविधता में छत्तीसगढ़ राज्य का विशेष स्थान है। छत्तीसगढ़ को "भारत का धड़कता हुआ हरित-हृदय" (Green Heart of India) कहा जाता है क्योंकि इसका लगभग 44 प्रतिशत क्षेत्र वनों से आच्छादित है।

वन और वन्यजीव केवल पर्यावरणीय दृष्टि से ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक, धार्मिक और आर्थिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। आदिवासी अंचलों में वन्य जीवों को देवत्व का स्थान दिया गया है और अनेक उत्सव व पर्व इन्हीं के इर्द-गिर्द मनाए जाते हैं।

इसी महत्व को ध्यान में रखते हुए, समय-समय पर छत्तीसगढ़ सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों को अभयारण्य (Sanctuaries) घोषित किया। अभयारण्य वह क्षेत्र है जहाँ शिकार, पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और औद्योगिक शोषण पर प्रतिबंध लगाया जाता है, ताकि वहाँ की जैव विविधता को सुरक्षित रखा जा सके।

अभयारण्य और राष्ट्रीय उद्यान में अंतर

कई बार पाठकों के मन में प्रश्न उठता है कि अभयारण्य (Wildlife Sanctuary) और राष्ट्रीय उद्यान (National Park) में क्या अंतर है।

  • अभयारण्य – यहाँ मानव गतिविधियों जैसे चराई, ग्रामीणों की सीमित गतिविधि, आदि आंशिक रूप से अनुमति होती है।
  • राष्ट्रीय उद्यान – यहाँ किसी भी प्रकार की मानव गतिविधि पर पूर्ण प्रतिबंध होता है। केवल पर्यटन और वैज्ञानिक अध्ययन ही संभव है।

इस प्रकार अभयारण्य संरक्षण की दृष्टि से राष्ट्रीय उद्यान से एक स्तर हल्का होता है, लेकिन दोनों का उद्देश्य एक ही है – वन्य जीवन और जैव विविधता का संरक्षण

अभयारण्यों की स्थापना का महत्व

छत्तीसगढ़ के अभयारण्यों की स्थापना कई कारणों से की गई –

  1. संकटग्रस्त प्रजातियों जैसे जंगली भैंसा, बाघ, गौर, स्लॉथ भालू आदि का संरक्षण।
  2. जैव विविधता को बचाना।
  3. पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना।
  4. आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक धरोहर सुरक्षित रखना।
  5. ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देकर ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराना।

छत्तीसगढ़ में वन्यजीव संरक्षण का इतिहास

1. प्राचीन काल में संरक्षण परंपरा

  • छत्तीसगढ़ के आदिवासी समाज में वन्यजीवों को देवता का दर्जा दिया गया।
  • नाग, बाघ, भैंसा, मोर, सर्प, बरगद, पीपल जैसे जीव-जंतु और वृक्ष पूजा के केंद्र बने।
  • “सारण” या “देवगुड़ी” जैसी परंपराओं में कुछ विशेष वनों और जीवों का संरक्षण पीढ़ियों से होता आया।
  • पांडव कालीन गुफाओं और शिलालेखों में भी वन्य जीवों के महत्व का उल्लेख मिलता है।

2. मध्यकालीन संरक्षण

  • रियासतकाल में (विशेषकर बस्तर, रायगढ़, सरगुजा राज्यों में) कई शासकों ने शिकार पर आंशिक प्रतिबंध लगाए।
  • शिकार का अधिकार केवल राजघरानों और विदेशी मेहमानों को दिया जाता था।
  • कुछ विशेष वन क्षेत्रों को “राजमहल के शिकार क्षेत्र” घोषित कर दिया गया था, जहाँ साधारण व्यक्ति प्रवेश नहीं कर सकते थे।
  • इससे अनजाने में ही वन और वन्यजीव का संरक्षण हुआ।

3. ब्रिटिश काल में वन प्रबंधन

  • अंग्रेजों ने पहली बार व्यवस्थित रूप से वन विभाग (Forest Department) की स्थापना की।
  • 1865 और 1878 के भारतीय वन अधिनियमों के अंतर्गत कई क्षेत्रों को आरक्षित वन (Reserved Forest) घोषित किया गया।
  • परंतु अंग्रेजों का मुख्य उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण नहीं, बल्कि लकड़ी और अन्य वन उत्पादों का शोषण था।
  • इस दौरान बाघ, तेंदुआ, भालू जैसे बड़े जीवों का शिकार बढ़ा, जिससे इनकी संख्या में भारी कमी आई।

4. स्वतंत्रता के बाद वन्यजीव संरक्षण

  • 1947 के बाद वन प्रबंधन राज्यों के हाथ में आया।
  • शुरूआती दशकों में वन्यजीव संरक्षण पर विशेष ध्यान नहीं दिया गया।
  • 1950–60 के दशक में बाघ, गौर, जंगली भैंसा जैसी प्रजातियों की संख्या चिंताजनक रूप से घट गई।
  • इसी कारण केंद्र सरकार ने कई कानून बनाए।

5. 1972 का वन्यजीव संरक्षण अधिनियम

भारत में वन्यजीव संरक्षण का वास्तविक दौर 1972 के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम से शुरू हुआ।

इस कानून के तहत –

  1. राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य घोषित करने की प्रक्रिया बनी।
  2. शिकार पर कड़ा प्रतिबंध लगाया गया।
  3. वन्य जीवों को अनुसूचियों (Schedules) में बाँटा गया – जैसे अनुसूची 1 में अति-संरक्षित प्रजातियाँ।
  4. दंडात्मक प्रावधान जोड़े गए।

छत्तीसगढ़ (तब मध्यप्रदेश का हिस्सा) में इसी अधिनियम के बाद कई क्षेत्र अभयारण्य घोषित किए गए।

6. “प्रोजेक्ट टाइगर” और “प्रोजेक्ट एलिफेंट”

  • 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर शुरू हुआ। इसके अंतर्गत अचानकमार अभयारण्य (बिलासपुर/मुंगेली) को “टाइगर रिजर्व” का दर्जा मिला।
  • 1992 में प्रोजेक्ट एलिफेंट की शुरुआत हुई। इसके अंतर्गत छत्तीसगढ़ के उदंती और सीतानदी अभयारण्य हाथियों के लिए संरक्षित क्षेत्र बने।

7. छत्तीसगढ़ राज्य गठन (2000) के बाद की स्थिति

  • 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ राज्य अस्तित्व में आया।
  • राज्य गठन के बाद वन्यजीव संरक्षण को नई प्राथमिकता दी गई।
  • सरकार ने कई नए अभयारण्यों की घोषणा की – जैसे तमोर पिंगला (सूरजपुर), बदलकुडूम (कोरबा) आदि।
  • “गौर संरक्षण परियोजना” और “जंगली भैंसा संरक्षण कार्यक्रम” जैसे राज्य-स्तरीय प्रयास भी शुरू किए गए।

8. वर्तमान परिदृश्य

आज छत्तीसगढ़ में –

  • 11 वन्यजीव अभयारण्य
  • 3 राष्ट्रीय उद्यान
  • 1 टाइगर रिजर्व (अचानकमार)
  • मौजूद हैं।
  • यहाँ बाघ, तेंदुआ, भालू, गौर, हाथी, जंगली भैंसा जैसी प्रजातियाँ विशेष संरक्षण में हैं।

छत्तीसगढ़ के वन्य जीव अभ्यारण्य (Wildlife Sanctuary of Chhattisgarh)

परिचय

छत्तीसगढ़ भारत का एक समृद्ध वन प्रदेश है, जिसकी पहचान उसकी घनी हरियाली, जैव विविधता और आदिवासी संस्कृति से होती है। राज्य का कुल क्षेत्रफल 1,35,191 वर्ग किमी है, जिसमें से 59,772 वर्ग किमी क्षेत्र वन से आच्छादित है।

राज्य में कुल 11 वन्य जीव अभ्यारण्य (Wildlife Sanctuaries) और 3 राष्ट्रीय उद्यान (National Parks) हैं।

  • राष्ट्रीय उद्यानों का कुल क्षेत्रफल : 2929 वर्ग किमी
  • अभ्यारण्यों का कुल क्षेत्रफल : 3577 वर्ग किमी
  • कुल संरक्षित क्षेत्र : 6506 वर्ग किमी (राज्य के क्षेत्रफल का 4.81% और कुल वन क्षेत्र का 10.88%)

छत्तीसगढ़ के 11 वन्य जीव अभ्यारण्य (List of Wildlife Sanctuaries in Chhattisgarh)

  1. तमोरपिंगला वन्य जीव अभयारण्य (Tamor Pingla)
  2. सीतानदी वन्य जीव अभयारण्य (Sitanadi)
  3. अचानकमार वन्य जीव अभयारण्य (Achanakmar)
  4. सेमरसोत वन्य जीव अभयारण्य (Semarsot)
  5. गोमर्डा वन्य जीव अभयारण्य (Gomarda)
  6. पामेड़ वन्य जीव अभयारण्य (Pamed)
  7. बारनवापारा वन्य जीव अभयारण्य (Barnawapara)
  8. उदंती वन्य जीव अभयारण्य (Udanti)
  9. भोरमदेव वन्य जीव अभयारण्य (Bhoramdeo)
  10. भैरमगढ़ वन्य जीव अभयारण्य (Bhairamgarh)
  11. बादलखोल वन्य जीव अभयारण्य (Badalkhol)

(1) सीतानदी वन्य जीव अभयारण्य

  • जिला : धमतरी
  • स्थापना : 1974
  • क्षेत्रफल : 559 वर्ग किमी

🔹 विशेषताएँ

  • छत्तीसगढ़ का सबसे प्राचीन अभयारण्य
  • 2009 में टाइगर रिजर्व में शामिल
  • 2006 में उदंती के साथ प्रोजेक्ट टाइगर का हिस्सा
  • नामकरण सीतानदी नदी के नाम पर हुआ
  • तेंदुओं की सबसे अधिक संख्या यहाँ पाई जाती है

🔹 प्रमुख जीव

बाघ, तेंदुआ, उड़ने वाली गिलहरी, भेड़िए, चिंकारा, ब्लैक बक, जंगली बिल्ली, नीलगाय, गौर, सांभर, पट्टीदार लकड़बग्घा, स्लॉथ भालू, जंगली कुत्ता आदि।

🔹 प्रमुख पक्षी

तोते, बुलबुल, तीतर, मोर, हेरॉन्स, अगरेट, ड्रोंगो आदि।

🔹 वनस्पति

साल, टीक, बांस प्रमुख वृक्ष।

(2) अचानकमार वन्य जीव अभयारण्य

  • जिला : मुंगेली
  • स्थापना : 1975
  • राष्ट्रीय उद्यान घोषित : 1981
  • प्रोजेक्ट टाइगर : 1983
  • टाइगर रिजर्व : 2009
  • क्षेत्रफल : 552 वर्ग किमी

🔹 विशेष

  • यह भारत का 14वाँ बायोस्फियर रिजर्व है।

🔹 प्रमुख जीव

बाघ, तेंदुआ, जंगली भालू, लकड़बग्घा, भेड़िया, जंगली कुत्ता, सांभर, नीलगाय, चिंकारा, ब्लैक बक, जंगली सूअर आदि।

(3) बादलखोल वन्य जीव अभयारण्य

  • जिला : जशपुर
  • स्थापना : 1975
  • क्षेत्रफल : 105 वर्ग किमी

🔹 विशेष

  • प्रमुख वृक्ष – साल, साजा, धावड़ा, बीजा, महुआ, तेंदू आदि।
  • औषधीय पौधे जैसे सतावर, तिखरु, काली/सफेद मूसली यहाँ पाए जाते हैं।

🔹 प्रमुख जीव

तेंदुआ, चीतल, जंगली सुअर, भालू, लकड़बग्घा, खरगोश, गोह, मोर।

(4) गोमर्डा वन्य जीव अभयारण्य

  • जिला : रायगढ़
  • स्थापना : 1975
  • क्षेत्रफल : 278 वर्ग किमी

🔹 प्रमुख जीव

बाघ, तेंदुआ, चीतल, सांभर, नीलगाय, भालू, सोनकुत्ता।

🔹 प्रमुख वृक्ष

साजा, धावरा, तेंदू, महुआ, आंवला, सलई, बीजा, अर्जुन।

(5) बारनवापारा वन्य जीव अभयारण्य

  • जिला : महासमुंद
  • स्थापना : 1976
  • क्षेत्रफल : 245 वर्ग किमी

🔹 विशेष

  • नामकरण बारनवापारा गाँव पर हुआ।
  • यहाँ 150 से अधिक प्रजातियों के पक्षी पाए जाते हैं।

🔹 प्रमुख जीव

बाघ, तेंदुआ, भालू, गौर, नीलगाय, सांभर, जंगली सूअर, लकड़बग्घा, लोमड़ी, जंगली मुर्गा।

🔹 पर्यटक स्थल

  • देवधारा जलप्रपात, तेलईधारा जलप्रपात।

(6) तमोर पिंगला वन्य जीव अभयारण्य

जिला: सूरजपुर

स्थापना: 1978

क्षेत्रफल: 607 वर्ग किलोमीटर

🔹 विशेषताएँ

  • यह छत्तीसगढ़ राज्य का सबसे बड़ा वन्य जीव अभयारण्य है।
  • अभयारण्य की दक्षिण-पश्चिमी सीमा रेहण्ड नदी द्वारा निर्धारित की गई है।
  • यहाँ गोड, पंड़ी, चेरवा, कोडकू और खैरवार जनजातियाँ निवास करती हैं।

🔹 जीव-जंतु

  • मुख्य मांसाहारी: शेर और तेन्दुआ
  • शाकाहारी और अन्य स्तनधारी: गौर, नीलगाय (अधिकतम संख्या), सांभर, चीतल, भालू, जंगली सुअर, चिंकारा, कोटरी, लंगूर, बंदर
  • पक्षी: मोर, नीलकंठ, तोता, कोयल, जंगली मुर्गा, भृंगराज, बुलबुल, दूधराज, पपीहा, तीतर, मैना

🔹 प्रमुख वृक्ष

साल, साजा, धावड़ा, महुआ, तेन्दू, अर्जुन, तिन्सा, हल्दू, आंवला, चारकारी, बांस, धवई, घोट

प्रमुख पर्यटक स्थल

  • देवी झिरिया मंदिर
  • बेंगाची पहाड़
  • लेफरी घाट
  • सुईलना, घोड़ापाट
  • माल्हन देवी स्थल
  • कुदरू घाघ
  • केदू झरिया

(7) सेमरसोत वन्य जीव अभयारण्य

जिला: बलरामपुर

स्थापना: 1978

क्षेत्रफल: 430 वर्ग किलोमीटर

🔹 विशेषताएँ

  • अभयारण्य में सेंदरी, सेमरसोत, चनआन, सॉंसू, सेंन्दुर और मोगराही नदियाँ बहती हैं।

🔹 जीव-जंतु

  • शेर, तेन्दुआ, गौर, नीलगाय, चीतल, सांभर, सोनकुत्ता, भालू, कोटरी, सेही
  • सभी जीव यहाँ स्वच्छंद विचरण करते हैं।

🔹 प्रमुख वृक्ष

साल, साजा, बीजा, शीसम, खम्हार, हल्दू, बांस

प्रमुख पर्यटक स्थल

  • पवई जलप्रपात
  • तातापानी

(8) भैरमगढ़ वन्य जीव अभयारण्य

जिला: बीजापुर

स्थापना: 1983

क्षेत्रफल: 139 वर्ग किलोमीटर

🔹 विशेषताएँ

  • उत्तरी सीमा पर बहने वाली इन्द्रावती नदी इसकी उत्तर सीमा बनाती है।

🔹 प्रमुख वृक्ष

सागौन, साजा, बांस

पर्यटक स्थल

  • इन्द्रावती नदी के किनारे का मनोरम दृश्य

(9) पामेड वन्य जीव अभयारण्य

जिला: बीजापुर

स्थापना: 1983

क्षेत्रफल: 265 वर्ग किलोमीटर

🔹 जीव-जंतु

  • बाघ, चीतल, तेन्दुआ, सांभर

🔹 प्रमुख वृक्ष

  • साल, साजा

(10) उदंती वन्य जीवन अभयारण्य

जिला: गरियाबंद

स्थापना: 1983

क्षेत्रफल: 230 वर्ग किलोमीटर

🔹 विशेषताएँ

  • पश्चिम से पूर्व की ओर बहने वाली उदंती नदी के नाम पर इसका नाम रखा गया।
  • 2006 में प्रोजेक्ट टाइगर में शामिल, और 2009 से टाइगर रिजर्व का हिस्सा।

🔹 दर्शनीय स्थल

  • गोडेना जलप्रपात: कर्रलाझर से 8 कि.मी. दूर, शांत और मनोरम स्थान।
  • देवधारा जलप्रपात: तौरेंगा से 12 कि.मी., 1.5 कि.मी. पैदल यात्रा के बाद पहुँच सकते हैं, बांस और मिश्रित वन से घिरा।

🔹 जीव-जंतु

  • जंगली भैंसों की बहुतायत

(11) भारेमदेव वन्य जीवन अभयारण्य

जिला: कवर्धा

स्थापना: 2001

क्षेत्रफल: 165 वर्ग किलोमीटर

🔹 विशेषताएँ

  • यह छत्तीसगढ़ का सबसे नवीनतम अभ्यारण्य है।

🔹 प्रमुख पर्यटक स्थल

  • भोरमदेव मंदिर: 11वीं सदी का चंदेल शैली मंदिर, विष्णु को समर्पित, बाद में शिवलिंग स्थापित।
  • मडवामहल: भोरमदेव से 0.5 कि.मी., पत्थरों से निर्मित शिवमंदिर।
  • छेरी महल: भोरमदेव मंदिर के पास, 14वीं सदी का शिवमंदिर।
  • रानीदहरा जलप्रपात: 35 कि.मी., मैकल पर्वत के आगोस में 90 फीट ऊँचाई पर, मनोरम स्थल।

🔹 जीव-जंतु

  • शेर (बाघ), तेन्दुआ, लगड़ बग्घा, जंगली कुत्ता, भेड़िया, गीदड़, लोमड़ी, जंगली बिल्ली, चीतल, कोटरी, सांभर, नीलगाय, जंगली सुअर, वायसन (गौर), लंगूर, लाल-मुँह का बंदर, नेवला, खरगोश, बिज्जू आदि।

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