
यह लेख भाग 22 (Part XXII) — जो संविधान के अंतिम औपचारिक प्रावधानों का समाहार है - पर विस्तृत हिन्दी मार्गदर्शिका है। इसमें हम अनुच्छेद 393, 394, 394A और 395 का सरल अर्थ, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, व्यावहारिक परिणाम और परीक्षण/अभ्यास हेतू प्रश्नों का संग्रह प्रस्तुत करते हैं।
भाग 22 संविधान के समापन/औपचारिक अनुभाग को समेटता है— अर्थात संविधान का नाम, लागू होने की तारीख, हिन्दी में आधिकारिक पाठ का प्रावधान और उन पुराने कानूनों का निरस्तीकरण जो संविधान के लागू होने के बाद आवश्यक नहीं रहे। ऐसे प्रावधान यह सुनिश्चित करते हैं कि संविधान न केवल सिद्धांतों का संग्रह है, बल्कि उसे लागू करने का विधिक-औपचारिक ढाँचा भी उपलब्ध हो।
अनुच्छेद 393 बहुत संक्षेप में कहता है: "This Constitution may be called the Constitution of India." अर्थात संविधान का संक्षिप्त नाम ‘Constitution of India’ है — हिन्दी में सामान्यतः इसे 'भारतीय संविधान' कहा जाता है। यह प्रावधान औपचारिक है पर लेखन/प्रकाशन में एकरूपता बनाये रखना इसका उद्देश्य है।
अनुच्छेद 394 बताता है कि किन-किन धाराओं को तुरंत (at once) लागू किया जाना था और किस तिथि को शेष संविधान लागू होगा। ऐतिहासिक रूप से, कुछ धाराएँ — जो नागरिकता, रिक्त पद व निर्वाचन-प्रक्रियाओं आदि से संबंधित थीं — संविधान के लागू होते ही प्रभावी कर दी गयीं, जबकि शेष प्रावधान 26 जनवरी 1950 से प्रभावी हुए। इस अनुच्छेद ने 26 जनवरी 1950 को 'Commencement' (गणतंत्र दिवस) घोषित किया।
अनुच्छेद 394A संविधान में बाद में जोड़ा गया (Constitution (58th Amendment) Act, 1987) और इसका मर्म यह है कि राष्ट्रपति के माध्यम से संविधान का अधिकारी हिन्दी अनुवाद प्रकाशित किया जाए—जिसे हिन्दी में 'प्राधिकृत पाठ' माना जायेगा। अनुच्छेद 394A के मुख्य बिंदु संक्षेप में:
महत्त्व: 394A के आने के बाद हिन्दी भाषी न्याय-प्रयोग, प्रशासन और शिक्षा में संविधान का हिन्दी पाठ अधिक भरोसेमंद और विधिक रूप से समान महत्व का बना। यह बहुभाषी कानूनी व्यवस्था की दिशा में एक बड़ा कदम था।
अनुच्छेद 395 ने स्वतंत्रता-पूर्व के कुछ ब्रिटिश-काल के अधिनियमों और उनके पूरक प्रावधानों को निरस्त (repeal) कर दिया। प्रमुखतः इसमें The Indian Independence Act, 1947 और The Government of India Act, 1935 तथा उनसे संबंधित संशोधनों में से उन प्रावधानों को हटाया गया जो अब संविधान के साथ असंगत थे। यह निरस्तीकरण आवश्यक था ताकि संविधान और नए स्वतंत्र शासन के कानूनों के बीच द्वंद्व न रहे।
भाग 22 के ये औपचारिक प्रावधान कानून-व्यवस्था के सुचारु संचालन के लिए बहुमूल्य हैं:
भाग 22 छोटे आकार में होने के बावजूद संवैधानिक ढाँचे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है - यह संविधान को औपचारिक रूप देता है, गणतंत्र दिवस को Commencement के रूप में स्थायी बनाता है, हिन्दी को विधिक-स्तर पर अधिकारिक पाठ का दर्जा देता है (394A), और पुराने असंगत कानूनों को समाप्त कर के विधिक व्यवस्था को साफ़ करता है। ये व्यवस्थाएँ संविधान को सिर्फ़ सिद्धांत नहीं बल्कि क्रियान्वयन-योग्य उपकरण भी बनाती हैं।