
भाग IV को राज्य के नीति निदेशक तत्व*."Directive Principles of State Policy" (DPSP) कहा जाता है। इनका लक्ष्य है कि राज्य नीतियाँ ऐसी हों जो समाज के कमजोर वर्गों की सुरक्षा, आर्थिक समता, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्राम-स्वराज जैसे सिद्धांतों पर आधारित हों। DPSP कानून नहीं हैं - परन्तु ये राज्य के लिए अनिवार्य नीति-निर्देश हैं, जिन्हें लागू कर राज्य समग्र कल्याण की दिशा में काम करे।
दिए गए राज्य के नीति निदेशक तत्व का आदर्श स्रोत आयरलैंड के संविधान (मूलतः) तथा विविध समाजवादी और गांधीवादी विचारों का विकल्प था। संविधान सभा के ड्राफ्टिंग कमेटी ने इन्हें शामिल करने का उद्देश्य यह था कि संविधान केवल कानूनी दस्तावेज न रहे, बल्कि वह राज्य को नैतिक व सामाजिक लक्ष्य दे। राज्य के नीति निदेशक तत्व का एक मुख्य उद्धेश्य गरीबी उन्मूलन, संसाधन वितरण, शिक्षा एवं स्वास्थ्य में समानता, तथा ग्राम-स्वराज को बढ़ावा देना था।
ध्यान दें:राज्य के नीति निदेशक तत्व को justiciable नहीं माना गया - परन्तु सुप्रीम कोर्ट ने अनेक निर्णयों में कहा कि राज्य के नीति निदेशक तत्व और मौलिक अधिकारों (Part III) को सामंजस्य में पढ़ना चाहिए।
नीचे हर अनुच्छेद का संक्षेप और व्याख्या दी गई है - परीक्षा-उन्मुख बिंदुओं के साथ।
Part IV में प्रयुक्त 'State' वही होगी जो Part III में परिभाषित है। अर्थात् राज्य के कार्य और नीतियाँ राज्य के नीति निदेशक तत्व के दायरे में आ सकती हैं।
राज्य के नीति निदेशक तत्व को न्यायालय में लागू नहीं किया जा सकता — पर संविधान कहता है कि ये महत्वपूर्ण हैं और शासन की दिशा निर्धारित करते हैं। इसका मतलब यह है कि संसद व राज्य सरकारें इन निर्देशों के अनुसार नीतियाँ बनायें।
राज्य का उद्देश्य सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय सुनिश्चित करना है। यह Article welfare state की नींव है।
Article 39 राज्य के नीति निदेशक तत्व का केंद्र है — इसमें कई उप-निर्देश हैं जैसे कि संसाधनों का न्यायसंगत वितरण, बच्चों और माताओं की सुरक्षा, रोजगार तथा जीवन-स्तर में सुधार। विशेष तौर पर यह कहता है कि कानून बनाते व कार्यवाही करते समय राज्य को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आर्थिक लक्ष्यों को न्यायसंगत तरीके से पूरा किया जा सके।
न्याय सुलभ और सस्ता होना चाहिए; विधिक सहायता प्रणाली को सुदृढ़ किया जाना चाहिए ताकि गरीबों को भी न्याय मिल सके।
राज्य को ग्राम पंचायतों को सुदृढ़ बनाना चाहिए ताकि स्थानीय स्वशासन को प्रोत्साहित किया जा सके। यह गांधीवादी विचार का प्रतिबिम्ब है।
बे रोजगारों, वृद्धों, विधवाओं और असमर्थ व्यक्तियों के लिए सार्वजनिक सहायता उपलब्ध करानी चाहिए।
राज्य को श्रमिकों के हित में नीतियाँ बनानी चाहिए — उचित वेतन, चिकित्सा सुरक्षा और मातृत्व संरक्षण शामिल हैं।
Article 43 राज्य को निर्देश देता है कि वह उच्च जीवन-मानक सुनिश्चित करने के लिए नीतियाँ अपनाए; Article 43A कर्मियों की श्रमिक भागीदारी का संकेत देता है।
यह कहता है कि राज्य को नागरिक कानूनों को समेकित करने का लक्ष्य रखना चाहिए। यह विवादास्पद है क्योंकि यह व्यक्तिगत कानूनों के संशोधन से जुड़ा है।
प्रारम्भिक शिक्षा को मुफ्त और अनिवार्य करने का निर्देश दिया गया था — बाद में इसे Article 21A में कानून के रूप में जोड़ा गया।
राज्य को SCs/STs एवं अन्य कमजोर वर्गों के आर्थिक एवं शैक्षिक हितों की रक्षा करनी चाहिए।
यह राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में स्वस्थ्य और पोषण को रखता है — राज्य को गरीबी, कुपोषण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के मुद्दों पर नीति बनानी चाहिए।
Article 48 संबंधित नीति के माध्यम से कृषि और पशु-पालन को सुदृढ़ करने का निर्देश देता है; 48A पर्यावरण के संरक्षण के महत्व को रेखांकित करता है।
ऐतिहासिक स्मारकों की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करने का निर्देश है।
सिस्टम में प्रशासनिक सुधार कर न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं — जैसे अलग judicial service का विचार।
राज्य को विदेशी नीतियों में शांतिपूर्ण सिद्धांतों का पालन करने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने की सलाह दी गई है।
Exam Tip: Article 39 (विशेषकर clauses) और Article 37 के इतिहास को अच्छी तरह याद रखें — पूछे जाने की संभावना अधिक है।
राज्य के नीति निदेशक तत्व को सामान्यतः तीन समूहों में बाँटा जाता है—गांधीवादी, समाजवादी/कल्याणकारी और लिबरल-इंटेलेक्चुअल। यह विभाजन शैक्षिक उपयोगिता के लिए है, न्यायालय ने भी इन उद्देश्यों के आधार पर राज्य के नीति निदेशक तत्व का प्रयोग किया है।
शुरू में राज्य के नीति निदेशक तत्व को justiciable न मानते हुए भी सुप्रीम कोर्ट ने समय के साथ राज्य के नीति निदेशक तत्व को मौलिक अधिकारों के साथ सामंजस्य में पढ़ा और कई प्रमुख निर्देशों को लागू करने में मदद की। कुछ महत्वपूर्ण फैसले:
Q: क्या DPSP मौलिक अधिकारों से ऊपर हैं?
A: नहीं — Part III (Fundamental Rights) और Part IV (DPSP) दोनों महत्वपूर्ण हैं; न्यायालय ने कहा है कि दोनों को सामंजस्य में पढ़ना चाहिए।
Q: क्या राज्य के नीति निदेशक तत्व को संसद द्वारा लागू किया जा सकता है?
A: हाँ — संसद और राज्य विधानसभाराज्य के नीति निदेशक तत्व के दिशानिर्देशों के अनुरूप कानून बना सकती हैं।
Q: किसके द्वारा DPSP को संविधान में शामिल किया गया?
A: DPSP संविधान की मूल रचना का हिस्सा हैं — इन्हें संविधान सभा के ड्राफ्टिंग कमेटी ने शामिल किया।