
यह लेख भाग 2 के अनुच्छेद 5 से 11 का गहरा विश्लेषण, इतिहास, संशोधन टाइमलाइन और महत्वपूर्ण 50 प्रश्नोत्तर के साथ प्रस्तुत करता है।
1947 के विभाजन ने नागरिकता के प्रश्न को जटिल बना दिया। किन्हें किस राष्ट्र का नागरिक माना जाए-यह निर्णय तत्काल आवश्यक था। संविधान सभा ने इसीलिए Part II में शुरुआती नागरिकता नियम दिए ताकि 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने पर नागरिकों की पहचान स्पष्ट रहे।
ध्यान दें: आज की नागरिकता व्यवस्था मूलतः Citizenship Act, 1955 और उसके बाद के प्रावधानों पर चलती है, पर Part II का ऐतिहासिक और संवैधानिक महत्व आज भी बना हुआ है।
26 जनवरी 1950 को भारत में निवासरत वे व्यक्ति नागरिक माने जाएंगे जो (i) भारत में जन्मे हों, या (ii) जिनके माता/पिता में से कोई भारत में जन्मा हो, या (iii) जिनका भारत में लगातार 5 वर्ष का निवास रहा हो — बशर्ते अन्य कानूनों का पालन हो।
नागरिकता का स्पष्ट प्रारम्भिक आधार तय करना और विभाजन-पश्चात् शरणार्थियों के मुद्दे का प्रावधान करना।
विभाजन के दौरान पाकिस्तान से भारत आने वाले लोगों के लिए विशेष प्रावधान—कुछ शर्तों और पंजीकरण के अधीन नागरिकता प्रदान करने का नियम।
जो लोग भारत से पाकिस्तान गए और बाद में वापस आए, उनकी नागरिकता को लेकर विशेष प्रावधान दिए गए थे — यह भी विभाजन से जुड़ा एक अस्थायी नियम था।
यदि किसी का जन्म भारत में हुआ पर वह उस समय किसी अन्य देश में निवास कर रहा था, तो कुछ शर्तों पर उसे भारत का नागरिक माना जा सकता है — जैसे कि राजनयिक प्रतिनिधि के पास पंजीकरण।
यदि किसी व्यक्ति ने स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता ग्रहण कर ली है, तो वह अनुच्छेद 5,6,8 के तहत भारत का नागरिक नहीं माना जाएगा।
अनुच्छेद 5–9 के अनुसार जो नागरिक माने जाते हैं, वे संसद द्वारा बनाए जा सकने वाले कानूनों के अधीन रहते हुए भी नागरिक बने रहेंगे। अर्थात संसद नागरिकता नीति बदल सकती है।
संसद को नागरिकता के अर्जन, समाप्ति और अन्य संबंधित विषयों पर कानून बनाने का अधिकार है। यही आधार है जिस पर बाद में Citizenship Act, 1955 बनी।
अनुच्छेद 11 के आधार पर संसद ने 1955 में नागरिकता पर विस्तृत कानून बनाया — Citizenship Act. Act में जन्म, वंश (jus sanguinis), पंजीकरण, प्राकृतिककरण और पुनर्संस्थापन के नियम बताए गये हैं।
1955: Citizenship Act लागू हुआ।
1986: जन्म-आधारित नागरिकता में बदलाव (Act के तहत नियम संशोधित)।
2003: कुछ पंजीकरण और प्रलेखन नियम सख्त हुए — NRC/PR関連 चर्चाएँ शुरू।
2019: नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) पारित हुआ — विवादास्पद और व्यापक चर्चा में रहा।
2020-2024: न्यायालयीन चुनौतियाँ, लागू करने वाले निर्देश और स्थानीय प्रावधानों का विकास।
अनुच्छेद 5 संविधान लागू होने पर नागरिकताजन्म/वंश/5 वर्ष का निवास
अनुच्छेद 6 पाकिस्तान से आए प्रवासीविशेष पंजीकरण व शर्तें
अनुच्छेद 7 पाकिस्तान गये और लौटेविशेष शर्तें लागू
अनुच्छेद 8 विदेश में भारतीय मूलराजनयिक पंजीकरण पर नागरिकता
अनुच्छेद 9 विदेशी नागरिकता लेने परनागरिकता समाप्त
अनुच्छेद 10 नागरिकता का स्थायित्वसंसद द्वारा बनाए कानूनों के अधीन
अनुच्छेद 11 संसद का अधिकारनागरिकता पर विधि बनाने का अधिकार