Bilaspur | Sat, 14 March 2026

No Ad Available

छत्तीसगढ़ का नामकरण | छत्तीसगढ़ राज्य का नाम छत्तीसगढ़ क्यों पड़ा | 36 गढ़ों का इतिहास व सूची

04 Sep 2025 | Ful Verma | 374 views

छत्तीसगढ़ का नामकरण, छत्तीसगढ़ राज्य का नामकरण, छत्तीसगढ़ का नाम छत्तीसगढ़ क्यों पड़ा

छत्तीसगढ़ का नामकरण : विस्तृत ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक अधभूमिका

भारत के इतिहास और संस्कृति में प्रत्येक क्षेत्र की अपनी अलग पहचान है। मध्य भारत का भूभाग, जो आज “छत्तीसगढ़” के नाम से जाना जाता है, सदियों से अपनी प्राकृतिक संपदा, आदिवासी संस्कृति, लोककला, साहित्य और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए प्रसिद्ध रहा है। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि – छत्तीसगढ़ का नाम छत्तीसगढ़ क्यों पड़ा? आगे हम जानेंगे की छत्तीसगढ़ का नाम छत्तीसगढ़ क्यो पड

छत्तीसगढ़ राज्य का परिचय

  • राजधानी : रायपुर
  • क्षेत्रफल : 1,35,192 वर्ग किलोमीटर
  • जनसंख्या (2021 अनुमानित) : लगभग 3 करोड़
  • भौगोलिक स्थिति : भारत के मध्य भाग में स्थित
  • सीमाएँ :
  • उत्तर – उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश
  • दक्षिण – तेलंगाना और आंध्रप्रदेश
  • पश्चिम – महाराष्ट्र
  • पूर्व – ओडिशा और झारखंड
  • प्रमुख नदियाँ : महानदी, इंद्रावती, शिवनाथ, अरपा, हसदेव
  • विशेषताएँ : प्राकृतिक संसाधन (खनिज), घने वन, आदिवासी संस्कृति, लोककला और त्यौहार।

👉 “छत्तीसगढ़ का नाम छत्तीसगढ़ क्यों पड़ा?”

यह प्रश्न केवल एक प्रशासनिक नामकरण का विषय नहीं है, बल्कि यह इस भूमि के गौरव, परंपरा और सामूहिक सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ा है। आइए विस्तार से इसके ऐतिहासिक, भौगोलिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक पहलुओं का अध्ययन करें।

छत्तीसगढ़ का प्राचीन नाम : दक्षिण कोसल

  • छत्तीसगढ़ का प्राचीन नाम दक्षिण कोसल था।
  • रामायण में उल्लेख मिलता है कि भगवान श्रीराम की माता कौसल्या का मायका “कोसल” था।
  • गुप्तकालीन शिलालेखों और संस्कृत साहित्य में दक्षिण कोसल का उल्लेख मिलता है।
  • बौद्ध और जैन साहित्य में भी इस क्षेत्र को दक्षिण कोसल कहा गया है।

👉 यह दर्शाता है कि छत्तीसगढ़ का नामकरण केवल मध्यकालीन प्रशासनिक व्यवस्था का परिणाम नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें प्राचीन इतिहास में भी गहराई से जुड़ी हैं।

छत्तीसगढ़ नामकरण से जुड़ी प्रमुख मान्यताएँ

1. छत्तीस गढ़ों की अवधारणा

सबसे लोकप्रिय मान्यता है कि इस क्षेत्र में 36 प्रमुख गढ़ (किले/दुर्ग/गढ़ियाँ) थीं। इन्हीं के कारण इसका नाम पड़ा – छत्तीसगढ़

  • प्रत्येक गढ़ एक स्वतंत्र प्रशासनिक इकाई या रियासत थी।
  • इन गढ़ों के शासक अपने-अपने क्षेत्रों पर शासन करते थे।
  • समय के साथ ये गढ़ एक सामूहिक भूभाग के रूप में पहचाने जाने लगे।
  • यही पहचान बाद में “छत्तीसगढ़” शब्द में रूपांतरित हुई।

2. 36 जनजातियों से जुड़ी मान्यता

कुछ विद्वान मानते हैं कि “36” यहाँ की 36 प्रमुख जनजातियों को दर्शाता है।

  • सरगुजा, बस्तर और दंतेवाड़ा में प्राचीन काल से विभिन्न जनजातियाँ बसी थीं।
  • इनकी संख्या और विविधता इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान बनी।

3. 36 ग्राम/नगर की परंपरा

एक अन्य मान्यता है कि प्राचीन काल में इस भूभाग में 36 प्रमुख नगर/ग्राम थे, जिनसे यह नाम पड़ा।

4. धार्मिक दृष्टिकोण

लोकश्रुति के अनुसार इस क्षेत्र में 36 देवी-देवताओं के प्रमुख मंदिर थे।

  • आदिवासी समाज इन्हें अपने रक्षक देवता मानता था।
  • इस धार्मिक आस्था ने भी नामकरण को प्रभावित किया।

छत्तीसगढ़ के 36 गढ़ों की सूची (परंपरागत मान्यता अनुसार)

इतिहासकार डॉ. हीरालाल और ब्रिटिश गजेटियर में छत्तीसगढ़ के प्रमुख गढ़ों का उल्लेख मिलता है। परंपरागत सूची इस प्रकार है :

  1. रायगढ़
  2. सरगुजा
  3. खैरागढ़
  4. कवर्धा
  5. बिलासपुर
  6. पाली
  7. नरैनी
  8. जशपुर
  9. रायपुर
  10. दुर्ग
  11. बेमेतरा
  12. महासमुंद
  13. धमतरी
  14. कांकेर
  15. बस्तर (जगदलपुर)
  16. दंतेवाड़ा
  17. नारायणपुर
  18. बालोद
  19. गरियाबंद
  20. कोरिया
  21. मनेंद्रगढ़
  22. पेंड्रा
  23. कोरबा
  24. चांपा
  25. सक्ती
  26. अकलतरा
  27. शिवरीनारायण
  28. तखतपुर
  29. चांपा-जनजगीर
  30. लोरमी
  31. चंद्रपुर
  32. धर्मजयगढ़
  33. फिंगेश्वर
  34. अभनपुर
  35. सिमगा
  36. धरसींवा

(नोट : विभिन्न इतिहासकारों और स्रोतों में यह सूची कुछ भिन्न रूपों में मिलती है।)

विद्वानों और इतिहासकारों की राय

  • डॉ. हीरालाल – उन्होंने स्पष्ट कहा कि छत्तीसगढ़ नाम 36 गढ़ों से उत्पन्न हुआ।
  • पं. सुंदरलाल शर्मा – उन्होंने इस क्षेत्र की लोकमान्यताओं और गढ़ों को नामकरण का आधार बताया।
  • ब्रिटिश अधिकारी वायली (1862) – उन्होंने रायपुर गजेटियर में लिखा कि यहाँ 36 छोटे-छोटे प्रशासनिक गढ़ थे।
  • स्थानीय लोकगायक – अपने गीतों और गाथाओं में “छत्तीस गढ़” शब्द का उपयोग करते हैं।

सांस्कृतिक दृष्टि से छत्तीसगढ़ नाम का महत्व

  • “गढ़” शब्द वीरता और किलेबंदी की परंपरा का प्रतीक है।
  • “36” संख्या भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखती है (जैसे 36 गुण, 36 कौम आदि)।
  • यह नाम सामूहिकता और विविधता का द्योतक है।

छत्तीसगढ़ राज्य का गठन और नाम की पुनः पुष्टि

  • 1 नवम्बर 2000 को मध्यप्रदेश से अलग होकर नया राज्य छत्तीसगढ़ अस्तित्व में आया।
  • नामकरण का आधार ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान रही।
  • रायपुर को राजधानी बनाया गया।
  • यह नाम अलग सांस्कृतिक अस्तित्व और गौरव का प्रतीक बन गया।

छत्तीसगढ़ नाम से जुड़ी लोककथाएँ और गीत

  • छत्तीसगढ़ी लोकगीतों में “मोर छत्तीसगढ़, गढ़ के गहना” जैसे शब्द मिलते हैं।
  • पंथी और करमा नृत्यों में छत्तीसगढ़ की महिमा का वर्णन किया जाता है।
  • आदिवासी गाथाओं में इसे “गढ़ों की धरती” कहा गया है।

छत्तीसगढ़ के 36 गढ़ों का विस्तृत विवरण

छत्तीसगढ़ का नाम जिन “36 गढ़ों” से जुड़ा है, वे केवल किले नहीं थे, बल्कि प्रशासनिक इकाइयाँ, सांस्कृतिक केंद्र और शक्ति के प्रतीक भी थे। इन गढ़ों ने ही इस भूभाग को उसकी अलग पहचान दी। विभिन्न इतिहासकारों और परंपराओं के अनुसार गढ़ों की सूची कुछ भिन्न मिलती है, लेकिन परंपरागत रूप से माने जाने वाले गढ़ों का विवरण इस प्रकार है –

1. रायगढ़

  • इतिहास: रायगढ़ रियासत का प्रमुख गढ़। यहाँ जंजरदेव वंश और बाद में रायगढ़ नरेशों का शासन रहा।
  • सांस्कृतिक महत्व: कत्थक नृत्य और शास्त्रीय संगीत का बड़ा केंद्र।
  • वर्तमान: रायगढ़ जिला मुख्यालय, “सांस्कृतिक नगरी” के नाम से प्रसिद्ध।

2. सरगुजा

  • इतिहास: सरगुजा रियासत कलचुरी और गोंड शासकों के अधीन रही।
  • सांस्कृतिक महत्व: अंबिकापुर में माँ महामाया मंदिर और आदिवासी संस्कृति।
  • वर्तमान: सरगुजा जिला मुख्यालय।

3. खैरागढ़

  • इतिहास: गोंड शासकों का प्रमुख गढ़। बाद में राजनांदगांव रियासत में विलय।
  • सांस्कृतिक महत्व: कला और संगीत का गढ़।
  • वर्तमान: इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़।

4. कवर्धा

  • इतिहास: कलचुरी शासकों का गढ़।
  • सांस्कृतिक महत्व: भोरमदेव मंदिर (छत्तीसगढ़ का खजुराहो)।
  • वर्तमान: कबीरधाम जिला मुख्यालय।

5. बिलासपुर

  • इतिहास: अरपा नदी किनारे बसा, कलचुरी शासकों का गढ़।
  • सांस्कृतिक महत्व: धान का कटोरा कहलाता है।
  • वर्तमान: बिलासपुर उच्च न्यायालय का मुख्यालय।

6. पाली

  • इतिहास: कोरबा क्षेत्र का ऐतिहासिक गढ़, जैन और बौद्ध धर्म से जुड़ा।
  • सांस्कृतिक महत्व: पाली-तानाखार क्षेत्र प्राकृतिक और धार्मिक दृष्टि से समृद्ध।
  • वर्तमान: कोरबा जिला का हिस्सा।

7. नरैनी

  • इतिहास: मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा क्षेत्र का गढ़।
  • सांस्कृतिक महत्व: यहाँ स्थानीय राजाओं का प्रभाव रहा।
  • वर्तमान: अब छोटा प्रशासनिक केंद्र।

8. जशपुर

  • इतिहास: नागवंशी राजाओं का प्रमुख गढ़।
  • सांस्कृतिक महत्व: जलप्रपात, घने जंगल और आदिवासी संस्कृति।
  • वर्तमान: जशपुरनगर जिला मुख्यालय।

9. रायपुर

  • इतिहास: कलचुरी वंश की राजधानी। मराठा और अंग्रेजों ने भी यहाँ शासन किया।
  • सांस्कृतिक महत्व: ऐतिहासिक किला और धार्मिक स्थल।
  • वर्तमान: छत्तीसगढ़ की राजधानी।

10. दुर्ग

  • इतिहास: मराठा और भोंसले शासन का प्रभाव।
  • सांस्कृतिक महत्व: व्यापारिक गढ़।
  • वर्तमान: दुर्ग जिला, साथ ही भिलाई इस्पात संयंत्र।

11. बेमेतरा

  • इतिहास: छोटे सामंतों का गढ़।
  • सांस्कृतिक महत्व: कृषि प्रधान क्षेत्र।
  • वर्तमान: बेमेतरा जिला मुख्यालय।

12. महासमुंद

  • इतिहास: राजिम, शिवरीनारायण जैसे तीर्थस्थल यहाँ स्थित।
  • सांस्कृतिक महत्व: राजिम कुंभ के लिए प्रसिद्ध।
  • वर्तमान: महासमुंद जिला।

13. धमतरी

  • इतिहास: महानदी और शिवनाथ संगम क्षेत्र।
  • सांस्कृतिक महत्व: रूद्री महादेव और सिहावा पर्वत।
  • वर्तमान: धमतरी जिला।

14. कांकेर

  • इतिहास: गोंड शासकों का मजबूत गढ़।
  • सांस्कृतिक महत्व: कांकेर किला और जनजातीय संस्कृति।
  • वर्तमान: कांकेर जिला।

15. बस्तर (जगदलपुर)

  • इतिहास: बस्तर नरेशों की राजधानी।
  • सांस्कृतिक महत्व: दंतेश्वरी मंदिर और बस्तर दशहरा।
  • वर्तमान: जगदलपुर जिला मुख्यालय।

16. दंतेवाड़ा

  • इतिहास: बस्तर राजाओं की कुलदेवी दंतेश्वरी का गढ़।
  • सांस्कृतिक महत्व: धार्मिक तीर्थस्थल।
  • वर्तमान: दंतेवाड़ा जिला।

17. नारायणपुर

  • इतिहास: अबूझमाड़ क्षेत्र का गढ़।
  • सांस्कृतिक महत्व: अबूझमाड़िया जनजाति का निवास क्षेत्र।
  • वर्तमान: नारायणपुर जिला।

18. बालोद

  • इतिहास: दुर्ग और कांकेर के बीच का रणनीतिक गढ़।
  • सांस्कृतिक महत्व: सिवनी और पुरंदरी किले।
  • वर्तमान: बालोद जिला।

19. गरियाबंद

  • इतिहास: स्थानीय सामंतों का गढ़।
  • सांस्कृतिक महत्व: सीतानदी और राजीव लोचन मंदिर।
  • वर्तमान: गरियाबंद जिला।

20. कोरिया

  • इतिहास: कोरिया रियासत।
  • सांस्कृतिक महत्व: झरनों और प्राकृतिक संपदा से भरपूर।
  • वर्तमान: बैकुंठपुर जिला मुख्यालय।

21. मनेंद्रगढ़

  • इतिहास: कोरिया राज्य का हिस्सा।
  • सांस्कृतिक महत्व: पहाड़ी और खनिज संपन्न गढ़।
  • वर्तमान: नया जिला (कोरिया से अलग)।

22. पेंड्रा

  • इतिहास: पेंड्रा नरेशों का शासन।
  • सांस्कृतिक महत्व: अमरकंटक और गौरेला-पेंड्रा क्षेत्र।
  • वर्तमान: गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला।

23. कोरबा

  • इतिहास: जनजातीय शासकों का क्षेत्र।
  • सांस्कृतिक महत्व: उद्योग और ऊर्जा उत्पादन।
  • वर्तमान: कोरबा जिला।

24. चांपा

  • इतिहास: व्यापारिक गढ़।
  • सांस्कृतिक महत्व: हाट-बाजार और सांस्कृतिक मेल।
  • वर्तमान: जांजगीर-चांपा जिला।

25. सक्ती

  • इतिहास: सक्ती रियासत।
  • सांस्कृतिक महत्व: जमींदारी परंपरा और धार्मिक स्थल।
  • वर्तमान: सक्ती जिला।

26. अकलतरा

  • इतिहास: छोटा व्यापारिक गढ़।
  • सांस्कृतिक महत्व: प्राचीन मंदिर और तालाब।
  • वर्तमान: जांजगीर-चांपा क्षेत्र।

27. शिवरीनारायण

  • इतिहास: रामायण काल से जुड़ा धार्मिक गढ़।
  • सांस्कृतिक महत्व: श्रीरामचंद्रजी के वनगमन स्थल।
  • वर्तमान: शिवरीनारायण तीर्थस्थल।

28. तखतपुर

  • इतिहास: बिलासपुर रियासत का हिस्सा।
  • सांस्कृतिक महत्व: धान उत्पादन का केंद्र।
  • वर्तमान: तखतपुर तहसील।

29. चांपा-जांजगीर

  • इतिहास: जांजगीर रियासत।
  • सांस्कृतिक महत्व: विष्णु मंदिर, शक्ति पीठ और मेले।
  • वर्तमान: जांजगीर-चांपा जिला।

30. लोरमी

  • इतिहास: बिलासपुर क्षेत्र का गढ़।
  • सांस्कृतिक महत्व: लोककला और ग्राम संस्कृति।
  • वर्तमान: लोरमी तहसील।

31. चंद्रपुर

  • इतिहास: आदिवासी राजाओं का गढ़।
  • सांस्कृतिक महत्व: दक्षिण कोरिया और छग की सीमा पर।
  • वर्तमान: छोटे कस्बे के रूप में मौजूद।

32. धर्मजयगढ़

  • इतिहास: रायगढ़ रियासत का हिस्सा।
  • सांस्कृतिक महत्व: जंगल और प्राकृतिक संपदा।
  • वर्तमान: रायगढ़ जिला।

33. फिंगेश्वर

  • इतिहास: धार्मिक गढ़।
  • सांस्कृतिक महत्व: शिव मंदिर और मेलों के लिए प्रसिद्ध।
  • वर्तमान: गरियाबंद क्षेत्र।

34. अभनपुर

  • इतिहास: रायपुर रियासत का हिस्सा।
  • सांस्कृतिक महत्व: कृषि और व्यापारिक मंडी।
  • वर्तमान: रायपुर जिले की तहसील।

35. सिमगा

  • इतिहास: बिलासपुर और रायपुर सीमा का गढ़।
  • सांस्कृतिक महत्व: सांस्कृतिक लोकनृत्य का केंद्र।
  • वर्तमान: सिमगा तहसील।

36. धरसींवा

  • इतिहास: रायपुर रियासत का हिस्सा।
  • सांस्कृतिक महत्व: प्राकृतिक और कृषि क्षेत्र।
  • वर्तमान: रायपुर जिला।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ का नाम केवल गढ़ों से नहीं जुड़ा है, बल्कि यह एक समग्र सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान है।

  • यह नाम लोककथाओं, जनजातीय विविधता, वीरता और परंपराओं को संजोए हुए है।
  • आधुनिक काल में यह नाम राज्य की स्वतंत्र अस्मिता और गौरव का प्रतीक है।