
G7 (Group of Seven) विश्व के सात सबसे विकसित औद्योगिक लोकतांत्रिक देशों का समूह है। इसमें अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, जापान, इटली और कनाडा शामिल हैं। यूरोपीय संघ भी इसमें सहभागी के रूप में शामिल होता है।
G7 की शुरुआत 1975 में हुई जब छह देशों (अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान) ने पहली बैठक फ्रांस में की थी। बाद में 1976 में कनाडा जुड़ा और इसे G7 नाम दिया गया।
2025 का G7 शिखर सम्मेलन जर्मनी की मेज़बानी में आयोजित हुआ। इसमें जलवायु परिवर्तन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वैश्विक सुरक्षा, ऊर्जा संकट और विकासशील देशों के सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
भारत G7 का स्थायी सदस्य नहीं है, लेकिन 2025 शिखर सम्मेलन में भारत को विशेष आमंत्रित के रूप में बुलाया गया। भारत ने वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज़ उठाई और ऊर्जा, डिजिटल सहयोग तथा जलवायु न्याय पर जोर दिया।
G7 केवल विकसित देशों का समूह है, जबकि G20 में विकसित और विकासशील दोनों देशों का प्रतिनिधित्व है। G20 में भारत, चीन, ब्राज़ील जैसे देश शामिल हैं और इसकी वैश्विक महत्ता अधिक व्यापक है।
भारत को अक्सर G7 बैठकों में आमंत्रित किया जाता है क्योंकि भारत आज विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और एक महत्वपूर्ण लोकतंत्र है। भारत की नीतियाँ ऊर्जा, तकनीक और सुरक्षा के मुद्दों पर G7 के लिए अहम मानी जाती हैं।
1. G7 की स्थापना कब हुई थी?
उत्तर: 1975
2. G7 का स्थायी सदस्य कौन-कौन से देश हैं?
उत्तर: अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, जापान, इटली और कनाडा
3. G7 शिखर सम्मेलन 2025 की मेज़बानी किसने की?
उत्तर: जर्मनी
4. भारत G7 का स्थायी सदस्य है या आमंत्रित?
उत्तर: आमंत्रित
5. यूरोपीय संघ की G7 में क्या भूमिका है?
उत्तर: सहभागी
G7 केवल एक आर्थिक संगठन नहीं है, बल्कि यह विश्व की दिशा तय करने वाला समूह है। 2025 का G7 शिखर सम्मेलन भारत सहित विकासशील देशों के लिए महत्वपूर्ण संदेश लेकर आया और यह दिखाता है कि वैश्विक चुनौतियों से निपटने में सहयोग अनिवार्य है।