
भाग 10 का उद्देश्य उन क्षेत्रों में विशेष प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित करना है जहाँ अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes) की सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक विचारधाराएँ भिन्न होती हैं और जहाँ परंपरागत संस्थाएँ तथा जमीन-संबंधी व्यवस्थाएँ महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। अनुच्छेद 244 और 244A संविधान को यह शक्ति देते हैं कि वे Fifth और Sixth Schedule के माध्यम से ऐसे क्षेत्रों के लिए विशिष्ट नियम तय करें।
यह व्यवस्था आदिवासी समुदायों को उनकी सामाजिक पहचान, पारंपरिक कानूनों और जमीन-अधिकारों की सुरक्षा देने हेतु बनाई गई है ताकि तेज़ी से बदलते विकास के दौर में उनके स्वशासन और जीवन-अभिव्यक्ति का संरक्षण हो सके।
ब्रिटिश शासनकाल में 'Excluded Areas' और 'Partially Excluded Areas' की अवधारणा थी। स्वतंत्रता के बाद संविधान-निर्माणकर्ताओं ने इन ऐतिहासिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए Fifth और Sixth Schedule की व्यवस्था की ताकि परंपरागत प्रशासन और संसाधन प्रबंधन को संरक्षण मिल सके। संविधान के प्रारूप में यह संवैधानिक सुरक्षा आदिवासी अधिकारों को मान्यता देती है और संघीय ढांचे के भीतर विशिष्ट स्वायत्तता का प्रावधान करती है।
(1) इस संविधान में किसी बात के होते हुए भी, संसद विधि द्वारा असम राज्य के भीतर एक स्वशासी राज्य बना सकेगी, जिसमें छठी अनुसूची के पैरा 20 से संलग्न सारणी के भाग 1 में विनिर्दिष्ट सभी या कोई जनजाति क्षेत्र (पुर्णतः या भागतः) समाविष्ट होंगे और उसके लिए --
(2) खंड (1) में निर्दिष्ट विधि, विशिष्टतया,
(3) पूर्वोक्त प्रकार की किसी विधि का कोई संशोधन, जहां तक वह संशोधन खंड (2) के उपखंड (क) या उपखंड (ख) में विनिर्दिष्ट विषयों में से किसी से संबंधित है, तब तक प्रभावी नहीं होगा जब तक वह संशोधन संसद के प्रत्येक सदन में उफास्थित और मत देने वाले कम से कम दो-तिहाई सदस्यों द्वारा पारित नहीं कर दिया जाता है ।
(4) इस अनुच्छेद में निर्दिष्ट विधि को अनुच्छेद 368 के प्रयोजनों के लिए इस संविधान का संशोधन इस बात के होते हुए भी नहीं समझा जाएगा कि उसमें कोई ऐसा उपबंध अंतर्विष्ट है जो इस संविधान का संशोधन करता है या संशोधन करने का प्रभाव रखता है ।
Fifth Schedule उन राज्यों के जिलों/क्षेत्रों के लिये विशेष प्रावधान देता है जहाँ अनुसूचित जनजातियों की उपस्थिति ज्यादा है। इसका लक्ष्य है समुदाय-आधारित संसाधन प्रबंधन, भूमि-संरक्षण, और स्थानीय परंपराओं की रक्षा।
Fifth Schedule के प्रमुख तत्त्व
व्यावहारिक प्रभाव
Fifth Schedule के तहत लागू नियमों से पारंपरिक भूमि-अधिकार सुरक्षित रहते हैं, औद्योगिक परियोजनाओं के लिये परामर्श की प्रक्रिया अनिवार्य होती है और स्थानीय स्वशासन को प्रोत्साहन मिलता है।
Sixth Schedule पूर्वोत्तर राज्यों के कुछ भागों में स्वायत्त जिला परिषदों के माध्यम से विशेष स्वशासन प्रदान करता है। इन ADCs को सीमित विधायी, प्रशासनिक और न्यायिक शक्तियाँ दी जाती हैं।
ADCs की संरचना
ADCs के अधिकार
PESA का उद्देश्य Fifth Schedule के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में पंचायत व्यवस्था को स्थानीय परंपरागत संस्थाओं और जनजातीय स्वशासन के अनुरूप विस्तारित करना है। PESA स्थानीय निर्णय-प्रक्रिया और संसाधन नियंत्रण को मजबूत करने के लिये बना एक महत्वपूर्ण कानून है।
PESA के महत्वपूर्ण प्रावधान
महत्वपूर्ण: PESA का प्रभाव तभी अधिक होता है जब राज्य सरकारें इसे सही ढंग से लागू कर के स्थानीय संस्थाओं को वास्तविक निर्णय-शक्ति दें और वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराएँ।
नीचे कुछ राज्यों/क्षेत्रों के उदाहरण और उनके प्रावधान दिए जा रहे हैं, ताकि पाठक व्यवहारिक समझ प्राप्त कर सकें:
छत्तीसगढ़ व ओडिशा में Fifth Schedule वाले कई जिले हैं जहाँ भूमि संरक्षण, वन अधिकार और लोकपरंपराओं का संरक्षण केंद्रीय व राज्य नीतियों के जरिये किया जाता है। PESA के अनुरूप पंचायतों को अधिक निर्णय-शक्ति देने के लिए राज्य-स्तर योजनाएँ बनाई गई हैं, पर कार्यान्वयन चुनौतीपूर्ण रहा है।
झारखंड में भी अनुसूचित क्षेत्रों में पारंपरिक भूमि-स्वामित्व और वनाधिकार के अधिकारों के संवैधानिक संरक्षण पर विशेष जोर है। खनन और विकास परियोजनाओं के कारण स्थानीय समुदायों के अधिकारों और विस्थापन के मुद्दे सामने आते रहते हैं।
Sixth Schedule के तहत Autonomous District Councils ने स्थानीय परंपराओं व न्यायिक प्रक्रियाओं को संरक्षित किया है। परन्तु ADC और राज्य सरकारों के बीच वित्तीय निर्भरता, अधिकारों की अस्पष्टता तथा बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर पर टकराव सामान्य परेशानियाँ हैं।
सम्बंधित मामलों में न्यायालयों ने यह स्पष्ट किया है कि Fifth/Sixth Schedule एवं PESA के प्रावधानों का उद्देश्य स्थानीय अधिकारों की रक्षा है। कई मामलों में न्यायालयों ने विकास परियोजनाओं में उचित परामर्श और मुआवजे की आवश्यकता को बल दिया है।
(यहाँ विशिष्ट मामलों/हाई-प्रोफाइल निर्णयों के उद्धरण जोड़ना उपयोगी होगा — यदि आप चाहें तो मैं प्रमुख सुप्रीम-कोर्ट निर्णयों की सूची और सार यहाँ जोड़ दूँ।)
नीचे कुछ व्यावहारिक नीति-सुझाव दिए जा रहे हैं, जिन्हें अपनाने पर आदिवासी क्षेत्रों के प्रशासन व संरक्षण में सुधार हो सकता है:
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