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भारतीय संविधान का भाग 9 पंचायती राज और स्थानीय स्वशासन अनुच्छेद 243 से 243-O

13 Aug 2025 | Ful Verma | 344 views

भारतीय संविधान का भाग 9 पंचायती राज और स्थानीय स्वशासन अनुच्छेद 243 से 243-O

भारतीय संविधान का भाग 9 अनुच्छेद 243 से 243-O

पंचायती राज और स्थानीय स्वशासन


भारतीय संविधान का भाग 9 पंचायती राज और स्थानीय स्वशासन

OnlineFreeGK.in में आपका हार्दिक स्वागत है। इस लेख में हम भारतीय संविधान के भाग 9 के अंतर्गत पंचायती राज व्यवस्था और स्थानीय स्वशासन के प्रावधानों को विस्तार से समझेंगे। 73वें संविधान संशोधन के बाद जो नियम बने, वे पंचायतों के गठन, अधिकार, कार्य और संरचना को स्पष्ट करते हैं।

➦ पंचायती राज का परिचय

  • पंचायती राज व्यवस्था भारत के ग्रामीण स्थानीय स्वशासन का आधार है।
  • यह ग्राम, ब्लॉक और जिला स्तर पर जनता द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से प्रशासन की व्यवस्था करती है।
  • संविधान के भाग 9 अनुच्छेद 243 से 243-O पंचायत और ग्राम सभा के संविधान, उनकी कार्य अवधि, योग्यता और पंचायत की सदस्यता, शक्तियों, अधिकार और जिम्मेदारियों के अयोग्यता का वर्णन करता है।
  • यह हिस्सा पंचायतों के वित्तीय प्रबंधन, लेखा परीक्षा और अनुप्रयोगों की प्रक्रिया भी देता है।
  • अनुसूची 11 को 1992 में सत्तर-तीसरे संशोधन द्वारा जोड़ा गया था।
  • इसका उद्देश्य लोकतंत्र को गांव-गांव तक पहुंचाना और स्थानीय समस्याओं का समाधान करना है।

➦ 73वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 का महत्व

73वें संशोधन ने भारतीय संविधान में भाग 9 जोड़ा, जिससे पंचायतों को संविधानिक दर्जा मिला। इस संशोधन ने पंचायतों को अधिक शक्तियां और स्वायत्तता दी।

  • स्थानीय स्वशासन का संवैधानिक अधिकार दिया गया।
  • पंचायतों के गठन, चुनाव, कार्यकाल और वित्तीय प्रबंधन के नियम बनाए।
  • महिला प्रतिनिधित्व और अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया।
  • राज्यों को पंचायतों के लिए संविधान के अनुसार कानून बनाने का निर्देश दिया।

➦ भारतीय संविधान अनुच्छेद 243 (Article 243 )परिभाषाएं -

इस भाग में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,--

  • (क) “जिला” से किसी राज्य का जिला अभिप्रेत है ;
  • (ख) “ग्राम सभा” से ग्राम स्तर पर पंचायत के क्षेत्र के भीतर समाविष्ट किसी ग्राम से संबंधित निर्वाचक नामावली में रजिस्ट्रीकॄत व्यक्तियों से मिलकर बना निकाय अभिप्रेत है ;
  • (ग) “मध्यवर्ती स्तर” से ग्राम और जिला स्तरों के बीच का ऐसा स्तर अभिप्रेत है जिसे किसी राज्य का राज्यपाल , इस भाग के प्रयोजनों के लिए , लोक अधिसूचना द्वारा, मध्यवर्ती स्तर के रूप में विनिर्दिष्ट करे ;
  • (घ) “पंचायत” से ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अनुच्छेद 243ख के अधीन गठित स्वायत्त शासन की कोई संस्था (चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो) अभिप्रेत है ;
  • (ङ) “पंचायत क्षेत्र” से पंचायत का प्रादेशिक क्षेत्र अभिप्रेत है ;
  • (च) “जनसंख्या” से ऐसी अंतिम पूर्व वर्ती जनगणना में अभिनिश्चित की गई जनसंख्या अभिप्रेत है जिसके सुसंगत आंकड़े प्रकाशित हो गए हैं (छ) “ग्राम” से राज्यपाल द्वारा इस भाग के प्रयोजनों के लिए, लोक अधिसूचना द्वारा, ग्राम के रूप में विनिर्दिष्ट ग्राम अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत इस प्रकार विनिर्दिष्ट ग्रामों का समूह भी है ।

➦ भारतीय संविधान अनुच्छेद 243क (Article 243क ) ग्राम सभा-

  • ग्राम सभा, ग्राम स्तर पर ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कॄत्यों का पालन कर सकेगी, जो किसी राज्य के विधान-मंडल द्वारा, विधि द्वारा, उपबंधित किए जाएं ।

➦ भारतीय संविधान अनुच्छेद 239ख  (Article 239ख ) पंचायतों का गठन-

  • (1) प्रत्येक राज्य में ग्राम, मध्यवर्ती और जिला स्तर पर इस भाग के उपबंधों के अनुसार पंचायतों का गठन किया जाएगा ।
  • (2) खंड (1) में किसी बात के होते हुए भी, मध्यवर्ती स्तर पर पंचायत का उस राज्य में गठन नहीं किया जा सकेगा जिसकी जनसंख्या बीस लाख से अनधिक है ।

➦ भारतीय संविधान अनुच्छेद 239ग (Article 239ग ) पंचायतों की संरचना--

(1) इस भाग के उपबंधों के अधीन रहते हुए , किसी राज्य का विधान-मंडल, विधि द्वारा, पंचायतों की संरचना की बाबत उपबंध कर सकेगा :

परंतु किसी भी स्तर पर पंचायत के प्रादेशिक क्षेत्र की जनसंख्या का ऐसी पंचायत में निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की संख्या से अनुपात समस्त राज्य में यथासाध्य एक ही हो ।

(2) किसी पंचायत के सभी स्थान, पंचायत क्षेत्र में प्रादेशिक निर्वाचन-क्षेत्रों से प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा चुने हुए व्यक्तियों से भरे जाएंगे और इस प्रयोजन के लिए , प्रत्येक पंचायत क्षेत्र को प्रादेशिक निर्वाचन-क्षेत्रों में ऐसी रीति से विभाजित किया जाएगा कि प्रत्येक निर्वाचन-क्षेत्र की जनसंख्या का उसको आबंटित स्थानों की संख्या से अनुपात समस्त पंचायत क्षेत्र में यथासाध्य एक ही हो ।

(3) किसी राज्य का विधान-मंडल, विधि द्वारा,--

  • (क) ग्राम स्तर पर पंचायतों के अध्यक्षों का मध्यवर्ती स्तर पर पंचायतों में या ऐसे राज्य की दशा में, जहां मध्यवर्ती स्तर पर पंचायतें नहीं हैं, जिला स्तर पर पंचायतों में ;
  • (ख) मध्यवर्ती स्तर पर पंचायतों के अध्यक्षों का जिला स्तर पर पंचायतों में ;
  • (ग) लोक सभा के ऐसे सदस्यों का और राज्य की विधान सभा के ऐसे सदस्यों का, जो उन निर्वाचन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं जिनमें ग्राम स्तर से भिन्न स्तर पर कोई पंचायत क्षेत्र पुर्णतः या भागतः समाविष्ट है, ऐसी पंचायत में ;
  • (घ) राज्य सभा के सदस्यों का और राज्य की विधान परिषद् के सदस्यों का, जहां वे,--
  • (त्) मध्यवर्ती स्तर पर किसी पंचायत क्षेत्र के भीतरनिर्वाचकों के रूप में रजिस्ट्रीकॄत है, मध्यवर्ती स्तर पर पंचायत में ;
  • (त्त्) जिला स्तर पर किसी पंचायत क्षेत्र के भीतर निर्वाचकों के रूप में रजिस्ट्रीकॄत हैं, जिला स्तर पर पंचायत में, प्रतिनिधित्व करने के लिए उपबंध कर सकेगा ।

(4) किसी पंचायत के अध्यक्ष और किसी पंचायत के ऐसे अन्य सदस्यों को, चाहे वे पंचायत क्षेत्र में प्रादेशिक निर्वाचन-क्षेत्रों से प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा चुने गए हों या नहीं , पंचायतों के अधिवेशनों में मत देने का अधिकार होगा

(5)

  • (क) ग्राम स्तर पर किसी पंचायत के अध्यक्ष का निर्वाचन ऐसी रीति से, जो राज्य के विधान-मंडल द्वारा, विधि द्वारा, उपबंधित कीजाए, किया जाएगा ;और
  • (ख) मध्यवर्ती स्तर या जिला स्तर पर किसी पंचायत के अध्यक्ष का निर्वाचन, उसके निर्वाचित सदस्यों द्वारा अपने में से किया जाएगा ।

➦ भारतीय संविधान अनुच्छेद 243घ (Article 239घ )स्थानों का आरक्षण-

(1) प्रत्येक पंचायत में--

  • (क) अनुसूचित जातियों ;और

(ख) अनुसूचित जनजातियों, के लिए स्थान आरक्षित रहेंगे और इस प्रकार आरक्षित स्थानों की संख्या का अनुपात , उस पंचायत में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या से यथाशकक़्य वही होगा जो उस पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जातियों की अथवा उस पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या का अनुपात उस क्षेत्र की कुल जनसंख्या से है और ऐसे स्थान किसी पंचायत में भिन्न-भिन्न निर्वाचन क्षेत्रों को चक्रानुक्रम से आबंटित किए जा सकेंगे । (2) खंड (1) के अधीन आरक्षित स्थानों की कुल संख्या के कम से कम एक-तिहाई स्थान, यथास्थिति , अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों की स्त्रियों के लिए आरक्षित रहेंगे ।

(3) प्रत्येक पंचायत में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या के कम से कम एक-तिहाई स्थान (जिनके अंतर्गत अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की स्त्रियों के लिए आरक्षित स्थानों की संख्या भी है) स्त्रियों के लिए आरक्षित रहेंगे और ऐसे स्थान किसी पंचायत में भिन्न-भिन्न निर्वाचन-क्षेत्रों को चक्रानुक्रम से आबंटित किए जा सकेंगे ।

(4) ग्राम या किसी अन्य स्तर पर पंचायतों में अध्यक्षों के पद अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और स्त्रियों के लिए ऐसी रीति से आरक्षित रहेंगे, जो राज्य का विधान-मंडल, विधि द्वारा, उपबंधित करे : परंतु किसी राज्य में प्रत्येक स्तर पर पंचायतों में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित अध्यक्षों के पदों की संख्या का अनुपात, प्रत्येक स्तर पर उन पंचायतों में ऐसे पदों की कुल संख्या से यथाशक्य वही होगा, जो उस राज्य में अनुसूचित जातियों की अथवा उस राज्य में अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या का अनुपात उस राज्य की कुल जनसंख्या से है :

परंतु यह और कि प्रत्येक स्तर पर पंचायतों में अध्यक्षों के पदों की कुल संख्या के कम से कम एक-तिहाई पद स्त्रियों के लिए आरक्षित रहेंगे :

परंतु यह भी कि इस खंड के अधीन आरक्षित पदों की संख्या प्रत्येक स्तर पर भिन्न-भिन्न पंचायतों को चक्रानुक्रम से आबंटित की जाएगी ।

(5) खंड (1) और खंड (2) के अधीन स्थानों का आरक्षण और खंड (4) के अधीन अध्यक्षों के पदों का आरक्षण (जो स्त्रियों के लिए आरक्षण से भिन्न है) अनुच्छेद 334 में विनिर्दिष्ट अवधि की समाप्ति पर प्रभावी नहीं रहेगा ।

(6) इस भाग की कोई बात किसी राज्य के विधान-मंडल को पिछड़े हुए नागरिकों के किसी वर्ग के पक्ष में किसी स्तर पर किसी पंचायत में स्थानों के या पंचायतों में अध्यक्षों के पदों के आरक्षण के लिए कोई उपबंध करने से निवारित नहीं करेगी

➦ भारतीय संविधान अनुच्छेद 243ड (Article 243ड)पंचायतों की अवधि, आदि-

(1) प्रत्येक पंचायत, यदि तत्समय प्रवॄत्त किसी विधि के अधीन पहले ही विघटित नहीं कर दी जाती है तो, अपने प्रथम अधिवेशन के लिए नियत तारीख से पांच वर्ष तक बनी रहेगी, इससे अधिक नहीं ।

(2) तत्समय प्रवॄत्त किसी विधि के किसी संशोधन से किसी स्तर पर ऐसी पंचायत का, जो ऐसे संशोधन के ठीक पूर्व कार्य कर रही है, तब तक विघटन नहीं होगा जब तक खंड (1) में विनिर्दिष्ट उसकी अवधि समाप्त नहीं हो जाती ।

(3) किसी पंचायत का गठन करने के लिए निर्वाचन,--

  • (क) खंड (1) में विनिर्दिष्ट उसकी अवधि की समाप्ति के पूर्व ;
  • (ख) उसके विघटन की तारीख से छह मास की अवधि की समाप्ति के पूर्व , पूरा किया जाएगा :
  • परंतु जहां वह शेष अवधि, जिसके लिए कोई विघटित पंचायत बनी रहती, छह मास से कम है वहां ऐसी अवधि के लिए उस पंचायत का गठन करने के लिए इस खंड के अधीन कोई निर्वाचन कराना आवश्यक नहीं होगा ।

(4) किसी पंचायत की अवधि की समाप्ति के पूर्व उस पंचायत के विघटन पर गठित की गई कोई पंचायत, उस अवधि के केवल शेष भाग के लिए बनी रहेगी जिसके लिए विघटित पंचायत खंड(1) के अधीन बनी रहती, यदि वह इस प्रकार विघटित नहीं की जाती ।

➦ भारतीय संविधान अनुच्छेद 243च (Article 243च ) सदस्यता के लिए निरर्हताएं-

(1) कोई व्यक्ति किसी पंचायत का सदस्य चुने जाने के लिए और सदस्य होने के लिए निरर्हित होगा,--

  • (क) यदि वह संबंधित राज्य के विधान-मंडल के निर्वाचनों के प्रयोजनों के लिए तत्समय प्रवॄत्त किसी विधि द्वारा या उसके अधीन इस प्रकार निरर्हित कर दिया जाता है :
  • परंतु कोई व्यक्ति इस आधार पर निरर्हित नहीं होगा कि उसकी आयु फच्चीस वर्ष से कम है, यदि उसने इक्कीस वर्ष की आयु प्राप्त कर ली है ;
  • (ख) यदि वह राज्य के विधान-मंडल द्वारा बनाई गई किसी विधि द्वारा या उसके अधीन इस प्रकार निरर्हित कर दिया जाता है ।

(2) यदि यह प्रश्न उठता है कि किसी पंचायत का कोई सदस्य खंड (1) में वार्णित किसी निरर्हता से ग्रस्त हो गया है या नहीं तो वह प्रश्न ऐसे प्राधिकारी को, और ऐसी रीति से, जो राज्यका विधान-मंडल, विधि द्वारा, उपबंधित करे, विनिश्चय के लिए निर्देशित किया जाएगा ।

➦ भारतीय संविधान अनुच्छेद 243छ (Article 243छ) पंचायतों की शक्तियां , प्राधिकार और उत्तरदायित्व-

संविधान के उपबंधों के अधीन रहते हुए , किसी राज्य का विधान-मंडल, विधि द्वारा, पंचायतों को ऐसी शक्तियां और प्राधिकार प्रदान कर सकेगा, जो उन्हें स्वायत्त शासन की संस्थाओं के रूप में कार्य करने में समर्थ बनाने के लिए आवश्यक हों और ऐसी विधि में पंचायतों को उपयुक्त स्तर पर, ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए , जो उसमें विनिर्दिष्ट की जाएं , निम्नलिखित के संबंध में शक्तियां और उत्तरदायित्व न्यागत करने के लिए उपबंध किए जा सकेंगे, अर्थात् :--

(क) आार्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएं तैयार करना ;

(ख) आार्थिक विकास और सामाजिक न्याय की ऐसी स्कीमों को, जो उन्हें सौपीं जाएं, जिनके अंतर्गत वे स्कीमें भी हैं, जो ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध विषयों के संबंध में हैं, कार्यान्वित करना ।

➦ भारतीय संविधान अनुच्छेद 243ज (Article 243ज ) पंचायतों द्वारा कर अधिरोपित करने की शक्तियां और उनकी निधियां-

किसी राज्य का विधान-मंडल, विधि द्वारा,-

  • (क) ऐसे कर, शुल्क, पथकर और फीसें उद्गॄहीत, संगॄहीत और विनियोजित करने के लिए किसी पंचायत को, ऐसी प्रक्रिया के अनुसार और ऐसे निर्बंधनों के अधीन रहते हुए , प्राधिकॄत कर सकेगा ;
  • (ख) राज्य सरकार द्वारा उद्गॄहीत और संगॄहीत ऐसे कर, शुल्क, पथकर और फीसें किसी पंचायत को, ऐसे प्रयोजनों के लिए , तथा ऐसी शर्तों और निर्बंधनों के अधीन रहते हुए , समनुदिष्ट कर सकेगा ;
  • (ग) राज्य की संचित निधि में से पंचायतों के लिए ऐसे सहायता-अनुदान देने के लिए उपबंध कर सकेगा ;और
  • (घ) पंचायतों द्वारा या उनकी ओर से क्रमशः प्राप्त किए गए सभी धनों को जमा करने के लिए ऐसी निधियों का गठन करने और उन निधियों में से ऐसे धनों को निकालने के लिए भी उपबंध कर सकेगा, जो विधि में विनिर्दिष्ट किए जाएं ।

➦ भारतीय संविधान अनुच्छेद 243झ (Article 243झ ) वित्तीय स्थिति के पुनर्विलोकन के लिए वित्त आयोग का गठन-

(1) राज्य का राज्यपाल , संविधान (तिहत्तरवां संशोधन) अधिनियम, 1992 के प्रारंभ से एक वर्ष के भीतर यथाशीघ्र, और तत्पश्चात, प्रत्येक पांचवें वर्ष की समाप्ति पर, वित्त आयोग का गठन करेगा जो पंचायतों की वित्तीय स्थिति का पुनर्विलोकन करेगा, और जो--

  • (क)(त्) राज्य द्वारा उद्गॄहीत करों, शुल्कों, पथकरों और फीसों के ऐसे शुद्ध आगमों के राज्य और पंचायतों के बीच, जो इस भाग के अधीन उनमें विभाजित किए जाएं , वितरण को और सभी स्तरों पर पंचायतों के बीच ऐसे आगमों के तत्संबंधी भाग के आबंटन को ;
  • (त्त्) ऐसे करों, शुल्कों, पथकरों और फीसों के अवधारण को, जो पंचायतों को समनुदिष्ट की जा सकेंगी या उनके द्वारा विनियोजित की जा सकेंगी ;
  • (त्त्त्) राज्य की संचित निधि में से पंचायतों के लिए सहायता अनुदान को, शासित करने वाले सिद्धांतों के बारे में ;
  • (ख) पंचायतों की वित्तीय स्थिति को सुधारने के लिए आवश्यक अध्युपायों के बारे में ;
  • (ग) पंचायतों के सुदृढ़ वित्त के हित में राज्यपाल द्वारा वित्त आयोग को निर्दिष्ट किए गए किसी अन्य विषय के बारे में, राज्यपाल को सिफारिश करेगा ।

(2) राज्य का विधान-मंडल, विधि द्वारा, आयोग की संरचना का, उन अर्हताओं का, जो आयोग के सदस्यों के रूप में नियुक्ति के लिए अपेक्षित होंगी, और उस रीति का, जिससे उनका चयन किया जाएगा , उपबंध कर सकेगा ।

(3) आयोग अपनी प्रक्रिया अवधारित करेगा और उसे अपने कॄत्यों के पालन में ऐसी शक्तियां होंगी जो राज्य का विधान-मंडल, विधि द्वारा, उसे प्रदान करे ।

(4) राज्यपाल इस अनुच्छेद के अधीन आयोग द्वारा की गई प्रत्येक सिफारिश को, उस पर की गई कार्रवाई के स्पष्टिकारक ज्ञाफन सहित, राज्य के विधान-मंडल के समक्ष रखवाएगा ।

➦ भारतीय संविधान अनुच्छेद 243ञ (Article 243ञ) पंचायतों के लेखाओं की संपरीक्षा -

  • किसी राज्य का विधान-मंडल, विधि द्वारा, पंचायतों द्वारा लेखे रखे जाने और ऐसे लेखाओं की संपरीक्षा करने के बारे में उपबंध कर सकेगा ।

➦ भारतीय संविधान अनुच्छेद 243ट (Article 243ट ) पंचायतों के लिए निर्वाचन-

  • (1) पंचायतों के लिए कराए जाने वाले सभी निर्वाचनों के लिए निर्वाचक नामावली तैयार कराने का और उन सभी निर्वाचनों के संचालन का अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण एक राज्य निर्वाचन आयोग में निहित होगा, जिसमें एक राज्य निर्वाचन आयुक्त होगा, जो राज्यपाल द्वारा नियुक्त किया जाएगा ।
  • (2) किसी राज्य के विधान-मंडल द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए, राज्य निर्वाचन आयुक्त की सेवा की शर्तें और पदावधि ऐसी होंगी जो राज्यपाल नियम द्वारा अवधारित करे :
  • परंतु राज्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर ही हटाया जाएगा , जिस रीति से और जिन आधारों पर उच्चन्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, अन्यथा नहीं और राज्य निर्वाचन आयुक्त की सेवा की शर्तों में उसकी नियुक्ति के पश्चात् उसके लिए अलाभकारी परिवर्तन नहीं किया जाएगा ।
  • (3) जब राज्य निर्वाचन आयोग ऐसा अनुरोध करे तब किसी राज्य का राज्यपाल , राज्य निर्वाचन आयोग को उतने कर्मचारिवॄंद उपलब्ध कराएगा जितने खंड (1) द्वारा राज्य निर्वाचन आयोग को उसे सौपें गए कॄत्यों के निर्वहन के लिए आवश्यक हों ।
  • (4) इस संविधान के उपबंधों के अधीन रहते हुए, किसी राज्य का विधान-मंडल, विधि द्वारा, पंचायतों के निर्वाचनों से संबंधित या संसक्त सभी विषयों के संबंध में उपबंध कर सकेगा ।

➦ भारतीय संविधान अनुच्छेद 243ठ (Article 243ठ ) संघ राज्यक्षेत्रों को लागू होना-

  • इस भाग के उपबंध संघ राज्यक्षेत्रों को लागू होंगे और किसी संघ राज्यक्षेत्र को उनके लागू होने में इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो किसी राज्य के राज्यपाल के प्रति निर्देश, अनुच्छेद 239 के अधीन नियुक्त संघ राज्यक्षेत्र के प्रशासक के प्रति निर्देश हों और किसी राज्य के विधान-मंडल या विधान सभा के प्रति निर्देश, किसी ऐसे संघ राज्यक्षेत्र के संबंध में, जिसमें विधान सभा है, उस विधान सभा के प्रति निर्देश हों :
  • परंतु राष्ट्रपति , लोक अधिसूचना द्वारा, यह निदेश दे सकेगा कि इस भाग के उपबंध किसी संघ राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग को ऐसे अपवादों और उपन्तारणों के अधीन रहते हुए , लागू होंगे, जो वह अधिसूचना में विनिर्दिष्ट करे ।

➦ भारतीय संविधान अनुच्छेद 243ड (Article 243ड) इस भाग का कतिपय क्षेत्रों को लागू न होना-

(1) इस भाग की कोई बात अनुच्छेद 244 के खंड (1) में निर्दिष्ट अनुसूचित क्षेत्रों और उसके खंड (2) में निर्दिष्ट जनजाति क्षेत्रों को लागू नहीं होगी ।

(2) इस भाग की कोई बात निम्नलिखित को लागू नहीं होगी, अर्थात् :--

  • (क) नागालैंड, मेघालय और मिजोरम राज्य ;
  • (ख) मणिफुर राज्य में ऐसे पर्वतीय क्षेत्र जिनके लिए तत्समय प्रवॄत्त किसी विधि के अधीन जिला परिषदें विद्यमान हैं ।

(3) इस भाग की--

  • (क) कोई बात जिला स्तर पर पंचायतों के संबंध में पश्चिमी बंगाल राज्य के दार्जिलिंग जिले के ऐसे पर्वतीय क्षेत्रों को लागू नहीं होगी जिनके लिए तत्समय प्रवॄत्त किसी विधि के अधीन दार्जिलिंग गोरखा पर्वतीय परिषद् विद्यमान है ;
  • (ख) किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह ऐसी विधि के अधीन गठित दार्जिलिंग गोरखा पर्वतीय परिषद् के कॄत्यों और शक्तियों पर प्रभाव डालती है ।
  • (3क) अनुसूचित जातियों के लिए स्थानों के आरक्षण से संबंधित अनुच्छेद 243घ की कोई बात अरुणाचल प्रदेश राज्य को लागू नहीं होगी ।]

(4) इस संविधान में किसी बात के होते हुए भी,--

  • (क) खंड (2) के उपखंड (क) में निर्दिष्ट किसी राज्य का विधान-मंडल,विधि द्वारा, इस भाग का विस्तार, खंड (1) में निर्दिष्ट क्षेत्रों के सिवाय, यदि कोई हों, उस राज्यपर उस दशा में कर सकेगा जब उस राज्य की विधान सभा इस आशय का एक संकल्प उस सदन की कुल सदस्य संख्या के बहुमत द्वारा तथा उस सदन के उफास्थित और मत देने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत द्वारा पारित कर देती है ;
  • (ख) संसद , विधि द्वारा, इस भाग के उपबंधों का विस्तार, खंड (1) में निर्दिष्ट अनुसूचित क्षेत्रों और जनजाति क्षेत्रों पर, ऐसे अपवादों और उपन्तारणों के अधीन रहते हुए , कर सकेगी, जो ऐसी विधि में विनिर्दिष्ट किए जाएं और ऐसी किसी विधि को अनुच्छेद 368 के प्रयोजनों के लिए इस संविधान का संशोधन नहीं समझा जाएगा ।

➦ भारतीय संविधान अनुच्छेद 243ढ (Article 243ढ ) विद्यमान विधियों और पंचायतों का बना रहना-

  • इस भाग में किसी बात के होते हुए भी, संविधान (तिहत्तरवां संशोधन) अधिनियम, 1992 के प्रारंभ के ठीक पूर्व किसी राज्य में प्रवॄत्त पंचायतों से संबंधित किसी विधि का कोई उपबंध , जो इस भाग के उपबंधों से असंगत है, जब तक सक्षम विधान-मंडल द्वारा या अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा उसे संशोधित या निरसित नहीं कर दिया जाता है या जब तक ऐसे प्रारंभ से एक वर्ष समाप्त नहीं हो जाता है, इनमें से जो भी पहले हो, तब तक प्रवॄत्त बना रहेगा 
  • परंतु ऐसे प्रारंभ के ठीक पूर्व विद्यमान सभी पंचायतें, यदि उस राज्य की विधान सभा द्वारा या ऐसे राज्य की दशा में, जिसमें विधान परिषद् है, उस राज्य के विधान-मंडल के प्रत्येक सदन द्वारा पारित इस आशय के संकल्प द्वारा पहले ही विघटित नहीं कर दी जाती हैं तो, अपनी अवधि की समाप्ति तक बनी रहेंगी ।

➦ भारतीय संविधान अनुच्छेद 243ण (Article 243ण) निर्वाचन संबंधी मामलों में न्यायालयों के हस्तक्षेप का वर्जन-

इस संविधान में किसी बात के होते हुए भी,-

  • (क) अनुच्छेद 243ट के अधीन बनाई गई या बनाई जाने के लिए तात्पर्यित किसी ऐसी विधि की विधिमान्यता, जो निर्वाचन-क्षेत्रों के परिसीमन या ऐसे निर्वाचन-क्षेत्रों को स्थानों के आबंटन से संबंधित है, किसी न्यायालय में प्रश्नगत नहीं की जाएगी ;
  • (ख) किसी पंचायत के लिए कोई निर्वाचन, ऐसी निर्वाचन अर्जी पर ही प्रश्नगत किया जाएगा जो ऐसे प्राधिकारी को और ऐसी रीति से प्रस्तुत की गई है, जिसका किसी राज्य के विधान-मंडल द्वारा बनाई गई किसी विधि द्वारा या उसके अधीन उपबंध किया जाए, अन्यथा नहीं ।

पंचायतों की संरचना

पंचायती राज व्यवस्था तीन स्तरों पर कार्य करती है:

  • ग्राम पंचायत (ग्रामीण क्षेत्र) - ग्राम स्तर पर
  • पंचायत समिति / ब्लॉक पंचायत - मध्य स्तर पर
  • जिला पंचायत - जिला स्तर पर

ग्राम पंचायत

यह सबसे निचला स्तर है, जिसमें ग्राम के सभी मतदाता सदस्य होते हैं। यह स्थानीय विकास कार्यों और प्रशासन का प्राथमिक केंद्र है।

पंचायत समिति

यह ब्लॉक स्तर पर कार्य करती है और ग्राम पंचायतों के बीच समन्वय का कार्य करती है।

जिला पंचायत

जिला स्तर पर जिला पंचायत क्षेत्र के विकास, योजना और प्रशासन की देखरेख करती है।

पंचायतों के कार्य और अधिकार

पंचायतों को संविधान द्वारा विभिन्न सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक कार्यों का अधिकार दिया गया है। इनके कार्यों में शामिल हैं:

  • स्थानीय विकास योजनाओं का क्रियान्वयन
  • सड़क, जल, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का प्रबंधन
  • सामाजिक न्याय और कल्याण कार्यक्रमों का संचालन
  • स्थानीय विवादों का समाधान
  • राजस्व संग्रह और वित्तीय प्रबंधन

पंचायत चुनाव और प्रतिनिधित्व

73वें संशोधन के तहत पंचायत चुनावों के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष प्रक्रिया सुनिश्चित की गई है। महिलाओं, अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षण अनिवार्य किया गया है।

6.1 महिला आरक्षण

कम से कम 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गई हैं ताकि वे स्थानीय प्रशासन में सक्रिय भागीदारी कर सकें।

6.2 अनुसूचित जाति एवं जनजाति का आरक्षण

सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने के लिए इन वर्गों के लिए भी पर्याप्त आरक्षण सुनिश्चित किया गया है।

पंचायती राज में वित्तीय स्वायत्तता

पंचायतों को कार्यों को करने के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं। इसके लिए राज्य सरकारें पंचायतों को अनुदान, कर वसूली, और अन्य वित्तीय साधन प्रदान करती हैं।

पंचायतों में चुनौतियां और सुधार

  • अपर्याप्त वित्तीय संसाधन
  • प्रशासनिक भ्रष्टाचार और कमजोर निगरानी
  • लोकतांत्रिक भागीदारी में कमी
  • महिला और अल्पसंख्यकों की भागीदारी बढ़ाना
  • तकनीकी एवं प्रशिक्षण की आवश्यकता

पंचायती राज का भविष्य

डिजिटल इंडिया, स्मार्ट ग्राम परियोजनाओं और स्थानीय प्रशासन में जागरूकता से पंचायती राज व्यवस्था को और मजबूत बनाने की संभावना है। यह भारत के लोकतंत्र को गहराई से बढ़ावा देने वाला एक मजबूत स्तंभ बनेगा।

निष्कर्ष

भारतीय संविधान के भाग 9 के तहत पंचायती राज व्यवस्था ने ग्रामीण भारत में लोकतंत्र को मजबूती दी है। 73वें संशोधन ने इसे संविधानिक मान्यता दी और स्थानीय स्वशासन को नई दिशा प्रदान की। पंचायती राज के सफल कार्यान्वयन से सामाजिक न्याय, विकास और जनभागीदारी सुनिश्चित होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. पंचायती राज व्यवस्था का उद्देश्य क्या है?

स्थानीय स्तर पर लोकतंत्र को सुदृढ़ करना और ग्रामीण विकास को प्रोत्साहित करना।

2. 73वाँ संविधान संशोधन कब लागू हुआ?

23 अप्रैल 1993 को पंचायती राज व्यवस्था को संविधानिक दर्जा मिला।

3. पंचायतों की तीन स्तर कौन-कौन से हैं?

ग्राम पंचायत, पंचायत समिति (ब्लॉक), और जिला पंचायत।

4. पंचायतों में महिला आरक्षण कितना है?

कम से कम 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।

5. पंचायतों के वित्तीय संसाधन कैसे उपलब्ध होते हैं?

राज्य सरकारों से अनुदान, कर वसूली और केंद्र की सहायता से।

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